नारी-नारी करके समाज को न बांटें
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :24 Mar 2015 4:06 AM (IST)
विज्ञापन

‘नारी पर आरी मत चलायें’ पत्र पढ़ कर दु:ख हुआ. इस नारी-नारी के खेल का अंत कितना भयानक हो सकता है, संभवत: इसका अंदाजा इस तथाकथित नारी प्रधान समाज को नहीं है. यदि शब्दों की परिसीमा न होती, तो लेखिका के तर्को को हवा होने में समय नहीं लगता. शायद आप यह भूल गये कि […]
विज्ञापन
‘नारी पर आरी मत चलायें’ पत्र पढ़ कर दु:ख हुआ. इस नारी-नारी के खेल का अंत कितना भयानक हो सकता है, संभवत: इसका अंदाजा इस तथाकथित नारी प्रधान समाज को नहीं है. यदि शब्दों की परिसीमा न होती, तो लेखिका के तर्को को हवा होने में समय नहीं लगता. शायद आप यह भूल गये कि देश में आत्महत्या करनेवालों की बड़ी संख्या उन लोगों की है जिन्हें दहेज के झूठे मामलों में फंसाया गया है.
क्या यह सिर्फ कुछ उदाहरण भर है? यह एक ऐसा सच है, जिसने दहेज प्रथा को खत्म तो नहीं किया, बल्कि नारी-नारी के खेल में न जाने कितने परिवारों को तबाह कर दिया. देश में महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए अनेक कानून हैं, लेकिन उनका कितना दुरुपयोग होता है, सभी जानते हैं. यौन शोषण तक के झूठे आरोप लगाये जा रहे हैं. नारी-नारी का राग अलाप कर समाज को न बांटें.
रणजीत, रांची
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




