शहरीकरण की होड़ में पर्यावरण क्षरण
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :12 Mar 2015 5:06 AM (IST)
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हमारे देश की जनसंख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. साथ ही शहरों में सुख-सुविधाएं बढ़ रही हैं. और इसके विपरीत देश के गांव पिछड़े, अशिक्षित और दरिद्र लोगों की बस्ती के रूप में जाने जा रहे हैं. शहरों की आबादी विकास, निर्माण और शैक्षणिक कार्यो में भागीदारी निभा कर और औद्योगिक इकाइयों का हिस्सा बन […]
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हमारे देश की जनसंख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. साथ ही शहरों में सुख-सुविधाएं बढ़ रही हैं. और इसके विपरीत देश के गांव पिछड़े, अशिक्षित और दरिद्र लोगों की बस्ती के रूप में जाने जा रहे हैं. शहरों की आबादी विकास, निर्माण और शैक्षणिक कार्यो में भागीदारी निभा कर और औद्योगिक इकाइयों का हिस्सा बन कर अपनी आजीविका चलाती है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में पेट भर भोजन पाने के लिए भी लोगों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं.
देश में तेजी से शहरीकरण किया जा रहा है. ग्रामीण भी अब शहरवासी बनने के सपने संजोने लगे हैं. उनके अंदर भी यह उम्मीद जगने लगी है कि उन्हें भी दो जून की रोटी आसानी से मिल सकेगी. लेकिन कब? यह पता नहीं. शहरीकरण की होड़ में हम पर्यावरण और प्रकृति का विनाश कर रहे हैं, यह किसी को पता नहीं.
अनुपम कुमार, देवघर
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