बेमन से कब तक बचेगा मनरेगा ?
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :10 Mar 2015 4:59 AM (IST)
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झारखंड सरकार के पास मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के मजदूरों को भुगतान करने के लिए पैसे नहीं हैं. कई जिलों में सरकारी खाते में मनरेगा का पैसा खत्म हो गया है. इसकी वजह से मनरेगा मजदूरों की करीब 20 करोड़ रुपये की बकाया मजदूरी का भुगतान नहीं हो पा रहा है. […]
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झारखंड सरकार के पास मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के मजदूरों को भुगतान करने के लिए पैसे नहीं हैं. कई जिलों में सरकारी खाते में मनरेगा का पैसा खत्म हो गया है. इसकी वजह से मनरेगा मजदूरों की करीब 20 करोड़ रुपये की बकाया मजदूरी का भुगतान नहीं हो पा रहा है.
ध्यान रहे कि मनरेगा योजना नहीं, बल्कि कानून है. ग्रामीण मजदूरों को साल में कम से कम 100 दिन काम देने का कानून. अगर लोगों को मनरेगा में 100 दिन काम नहीं मिल रहा है या मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा है, तो यह योजना में ढिलाई का मामला नहीं है, बल्कि कानून का उल्लंघन है. कानून तोड़ने का यह काम कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि संविधान से बंधी सरकारें कर रही हैं. इसमें ज्यादा गुनहगार केंद्र सरकार लग रही है क्योंकि अपने प्रति यह धारणा उसने खुद बनवायी है.
मनरेगा को लेकर मोदी सरकार का रवैया शुरू से ‘बेमन की शादी में कनपटी पर सिंदूर’ वाला रहा है. लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान में भी नरेंद्र मोदी ने मनरेगा को निशाने पर लिया था और इसे संसाधनों की बरबादी और लूट का जरिया करार दिया था. मोदी सरकार के शपथ लेने के बाद सरकार के मंत्रियों और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने जो संकेत दिये, उससे यह प्रतीत हुआ कि केंद्र सरकार मनरेगा के स्वरूप में बदलाव कर इसे रोजगार सृजन से ज्यादा परिसंपत्ति निर्मित के लिए बनाना चाहती है.
लेकिन अब लगता है कि केंद्र की मंशा मनरेगा को धीमी मौत मारने की है. केंद्र ने 2014-15 के बजट में मनरेगा के लिए 30 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया था, जिसे आनेवाले वित्तीय वर्ष के लिए बढ़ा कर 34,699 करोड़ कर दिया गया है. मनरेगा के लिए आवंटन तो ठीकठाक है, पर राज्यों को पैसा दिया नहीं जा रहा है.
चालू वित्तीय वर्ष में, झारखंड को केंद्र से मनरेगा के लिए 1391.57 करोड़ रुपये मिलने हैं, लेकिन अब तक मिले हैं सिर्फ 431.90 करोड़. चंद दिन पहले, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस का जवाब देते हुए नरेंद्र मोदी ने मनरेगा का मजाक उड़ाते हुए कहा, ‘‘यह कांग्रेस की 60 वर्ष की विफलता का स्मारक है, इसे मैं कभी बंद नहीं होने दूंगा.’’ यानी मोदी सरकार मनरेगा को न जीने देगी और न मरने देगी.
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