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करो कम, नगाड़ा बजाओ जम कर
लोकनाथ तिवारी प्रभात खबर, रांची बॉस लोग बेवजह फजीहत करने लगे हैं. बात बेबात फींचने लगे है. लगता है मार्च का महीना कपार पर आ गया है. अप्रेजल टाइम हो और आपके बॉस बिना बात के आपको डांटें नहीं. ऐसा होते कम से कम हमने तो नहीं देखा. इसलिए हमने भी ठान लिया है कि […]
लोकनाथ तिवारी
प्रभात खबर, रांची
बॉस लोग बेवजह फजीहत करने लगे हैं. बात बेबात फींचने लगे है. लगता है मार्च का महीना कपार पर आ गया है. अप्रेजल टाइम हो और आपके बॉस बिना बात के आपको डांटें नहीं. ऐसा होते कम से कम हमने तो नहीं देखा. इसलिए हमने भी ठान लिया है कि अब गुजरात मॉडल का सहारा लिये बिना कोई चारा नहीं है. वरना पिछली बार की तरह इस बार भी बाबा जी के ठुल्लू से ही संतोष करना पड़ेगा. अरे भाई गुजरात मॉडल नहीं जानते?
इसे तो अब अपना बराक भी जान गया है. गुजरात का मॉडल यह है कि करो जितना भी कम, नगाड़ा बजाओ जमकर. इसे अपने भाई लोग दूसरी तरह भी समझाते हैं, लेकिन उसे लिखना मुनासिब नहीं है. खैर पते की बात यह है कि गुजरात मॉडल अपनाकर आप फेल नहीं हो सकते हैं. भले ही आपका परफॉर्मेस कैसा भी हो. अपने कई शब्दकोषी भाई बंधु तो नगाड़े की बदौलत ही चांदी काट रहे हैं. यह मॉडल आजकल सफलता की कुंजी माना जा रहा है. अब तो इस मॉडल को उत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्य भी अपनाने लगे हैं. इनका मानना है कि नगाड़ा बजाने यानी पब्लिसिटी पर पूरा जोर देने की जरूरत है.
गुरु घंटालों का कहना है कि गुजरात में मीडिया को ही नहीं बल्कि पब्लिसिटी स्टंट में भाग लेनेवालों को भी पेटपूजा सहित सुस्वागत-सत्कार करने के साथ जाते समय 1000-2000 नकद थमा दिया जाता है. अब अखिलेश और ममता सरकार ने भी इसी पब्लिसिटी ‘मॉडल’ को अपना लिया है. जबकि सच्चई यह है कि वाइब्रैंट गुजरात में निवेश के जितने प्रस्ताव आते हैं, उनमें से बमुश्किल पांच फीसदी ही फलीभूत होते हैं. और तो और स्वाइन फ्लू में गुजरात सबसे आगे है. पता चला है कि गुजरात के स्वास्थ्य राज्य मंत्री शंकर चौधरी को भी स्वाइन फ्लू हो गया है.
गुजरात में स्वाइन फ्लू से हाहाकार मचा हुआ है. वहां स्वाइन फ्लू से 219 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 3 हजार 3 सौ लोग स्वाइन फ्लू से पीड़ित हैं. ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स’ के अनुसार, गुजरात भारत के पांच सबसे पिछड़े राज्यों में आता है. इसकी स्थिति बेहद गरीब देश हाइती से भी बदतर है. बाल मृत्यु दर भी गुजरात में 48 प्रतिशत है. भारत में इस मामले में सबसे बदतर राज्यों में इसका 10वां स्थान है. गुजरात के एक तिहाई वयस्कों का ‘बॉडी मास इंडेक्स’ 18.5 है. इस मामले में यह भारत का सातवां सबसे बदतर राज्य है. प्रसव के समय स्त्रियों की मृत्यु की दर भी गुजरात में सबसे ऊपर है.
शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रति व्यक्ति आय के मामले में यह देश के आठ राज्यों से पीछे है. इतना सब कुछ होने के बावजूद मजाल है कि किसी मीडिया में इसे तरजीह दी जाये. इसलिए भई नगाड़ा बजाइये, अपनी खामियों को ढकिये. काम करके कौन शाहजहां बन सकता है, यह आप भी जानते हैं और हम भी, फिर इस नुस्खे को अपनाने में हर्ज ही क्या है. अब तो बड़े-बड़े तीस मार खां भी गुजरात मॉडल की प्रशंसा करते नहीं थकते. आखिर इसकी सफलता की गारंटी जो है.
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