ऊर्जा संरक्षण के वास्ते सुलभता जरूरी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :03 Feb 2015 5:48 AM (IST)
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कुछ दिन पहले देवघर रेलवे स्टेशन के पास थैले में रखा बम एक बच्चे के हाथ लगाते ही फट गया. हालांकि, यह घटना खबर बनी, लेकिन असली मुद्दे पर किसी ने चर्चा नहीं की. वह मुद्दा था बालश्रम का. जिन बच्चों ने बम को देखा, वे कचरा बीननेवाले बच्चे थे. हमारे समाज के ज्यादातर बच्चे […]
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कुछ दिन पहले देवघर रेलवे स्टेशन के पास थैले में रखा बम एक बच्चे के हाथ लगाते ही फट गया. हालांकि, यह घटना खबर बनी, लेकिन असली मुद्दे पर किसी ने चर्चा नहीं की. वह मुद्दा था बालश्रम का. जिन बच्चों ने बम को देखा, वे कचरा बीननेवाले बच्चे थे. हमारे समाज के ज्यादातर बच्चे स्कूल जाते हैं, लेकिन कुछ बच्चे पेट की आग बुझाने के लिए बालश्रम करते हैं.
सवाल उठता है कि क्या ये शिक्षा पाने के हकदार नहीं हैं. शोध बताते हैं कि भारत में सबसे अधिक बालश्रम है. कैलाश सत्यार्थी को दिया गया नोबेल पुरस्कार बालश्रम उन्मूलन के नाम पर दिया गया, लेकिन देश की सड़कों पर कचरा बीननेवाले बच्चे उनके परिश्रम को झुठला रहे हैं.
भले सत्यार्थी पुरस्कार पाने के बाद फूले नहीं समा रहे होंगे, लेकिन बच्चों की दुर्दशा हालात को खुद बयां कर रहे हैं.
शिवेंद्र कुमार, पतरातू
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