श्रीमान 5000 बोतल की हो हार

Published at :02 Feb 2015 5:48 AM (IST)
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श्रीमान 5000 बोतल की हो हार

एमजे अकबर प्रवक्ता, भाजपा भारतीय समाज निरंतर प्रगतिशील बदलाव की ओर उन्मुख है. इसका एक स्वस्थ परिणाम मतदाताओं के ऐसे वर्ग का उद्भव है, जो जाति और संप्रदाय जैसे जीत के परंपरागत मानदंडों से इतर मतदान करते हैं. विधानसभा चुनाव से पहले किसी गोदाम में 5000 ह्विस्की की बोतलें रखवाने के लिए कितने लोगों की […]

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एमजे अकबर

प्रवक्ता, भाजपा

भारतीय समाज निरंतर प्रगतिशील बदलाव की ओर उन्मुख है. इसका एक स्वस्थ परिणाम मतदाताओं के ऐसे वर्ग का उद्भव है, जो जाति और संप्रदाय जैसे जीत के परंपरागत मानदंडों से इतर मतदान करते हैं.

विधानसभा चुनाव से पहले किसी गोदाम में 5000 ह्विस्की की बोतलें रखवाने के लिए कितने लोगों की जरूरत पड़ेगी? जिन लोगों को प्रभावित करने के लिए ये बोतलें रखी गयी थीं, उनमें बंटवाने के लिए जरूरी लोगों से निश्चित रूप से कम. ये बोतलें चुनाव आयोग के छापे में पकड़ी गयी हैं और साफ है कि इन्हें मतदाताओं को फुसलाने के लिए जमा किया गया था, क्योंकि यह अवैध था. वैध शराब वितरक को अपने सामान को छुपाने की जरूरत नहीं होती.

यह घटना इस बात का सबूत है कि भ्रष्टाचार के लिए गंभीर प्रबंधन कौशल की आवश्यकता होती है. जांच में समय लगता है और उसके पूरा होने से काफी पहले चुनाव समाप्त हो चुका होगा. इस कुहासे में मीडिया से सच छुपाया जा सकता है और प्रचार के दौरान पार्टियां अपनी कारगुजारियां अंजाम दे सकती हैं, लेकिन एक ऐसा समूह है, जिसे सच्चाई का पता होता है, वह है- मतदाता. आखिर शराब पीना-पिलाना हंसी-खुशी के माहौल में होता है. सिर्फ शराब के व्यसनी और अवसादग्रस्त लोग ही अकेले शराब पीते हैं.

बहरहाल, यह श्रीमान 5000 बोतल पुराने र्ढे के व्यक्ति मालूम पड़ते हैं. उनकी तरह के अन्य लोगों ने यही काम करने का अधिक स्मार्ट तरीका अपनाया है. वे सीधे-सीधे बोतल बांटने का काम नहीं करते, बल्कि लोगों को एक पर्ची थमा देते हैं, जिसे किसी खास शराब विक्रेता के पास ले जाना होता है और वहां पर्ची के बदले बोतल मिल जाती है.

इस घटना से एक-दो सवाल भी उठते हैं. सिद्धांत रूप में मान लेते हैं कि बरामद शराब जमा की गयी कुल शराब का एक छोटा हिस्सा भर था. श्रीमान 5000 बोतल की कुल जरूरत आराम से इससे दोगुनी या तिगुनी हो सकती है. इस प्रकार, उनका ह्विस्की का ही खर्च कम-से-कम 20 लाख या इससे कहीं अधिक है. इस हिसाब से उम्मीदवार का कुल खर्च दो करोड़ से अधिक है. ईश्वर ऐसे लोगों से दिल्ली को बचाये.

क्या इस तरह का घूस देना फायदेमंद होता है? शायद बहुत थोड़ा ही. भारतीय समाज निरंतर प्रगतिशील बदलाव की ओर उन्मुख है. इसका एक स्वस्थ परिणाम मतदाताओं के ऐसे वर्ग का उद्भव है, जो जाति और संप्रदाय जैसे जीत के परंपरागत मानदंडों से इतर मतदान करते हैं. वैसे मतदाता अभी भी बचे हैं और दिल्ली चुनाव में भी वे दिखेंगे, लेकिन इस प्रक्रिया में अब उनका निर्णायक स्थान नहीं रहा है.

जम्मू-कश्मीर के हालिया चुनाव से निकले आंकड़ों में एक तथ्य विशेष रूप से दिलचस्प है : डल झील के तट पर और श्रीनगर के किनारे बसे हजरतबल में 2635 घाटीवासी कश्मीरियों ने भाजपा के मसूद उल हसन के पक्ष में मतदान किया. यह बहुत बड़ी संख्या नहीं है, पर यह कुल मतदान का लगभग 10 फीसदी है तथा कांग्रेस को मिले वोटों से ढाई गुना है. हजरतबल बहुत खास जगह है और पूरी दुनिया में उस पवित्र स्थल के लिए प्रसिद्ध है, जहां मो-ए-मुकद्दस, पैगम्बर मुहम्मद का बाल, रखा हुआ है. ये कौन मतदाता हैं, जिन्होंने कमल के निशान का बटन दबाया? वे एक नये समुदाय से हैं, जिनके लिए विकास और रोजगार जातीय या भावनात्मक रुझानों से बहुत अधिक महत्वपूर्ण हैं. देश के अन्य हिस्सों में विकास के पक्ष में खड़ा समुदाय मतदाताओं का सबसे बड़ा हिस्सा बनता जा रहा है.

औरतें और युवा इस समुदाय के अगुवा हैं. दिल्ली में भाजपा के पक्ष में औरतों के भारी रुझान के दो बड़े अच्छे कारण हैं. जैसा कि उनकी प्रभावशाली भाषणशैली और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ आंदोलन जैसी नीतियों से स्पष्ट है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लैंगिक समानता और नारी सशक्तीकरण को अपने शासन का मूल तत्व बना दिया है. इससे मजबूत आधार बना है. दूसरा, महिलाएं किरण बेदी पर भरोसा करती हैं कि वे कई कारणों से आक्रोशित राजधानी में उनकी असुरक्षा की भावना को समझती हैं. उन्हें यह भी विश्वास है कि अनुभवी पुलिस अधिकारी होने के कारण बेदी शाब्दिक आश्वासन देने से अधिक कुछ कर सकेंगी.

भ्रष्टाचार, सुरक्षा और बेहतर जीवन दिल्ली के मतदाताओं की तीन मुख्य मांगें हैं. नरेंद्र मोदी का नेतृत्व, और दिल्ली में बेदी का कार्यपालक शासन, इन तीनों मसलों पर आश्वस्त करता है. दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी का समर्थन भावनात्मक मतों, या उन लोगों से आ रहा है, जो अभी भी भय की राजनीति से पीड़ित हैं.यह जमीनी हकीकत पर आधारित है, कोई निर्णय नहीं है. इस हिसाब से आप अतीत की राजनीति का प्रतिनिधित्व करती है.

मतदाता अपने आसपास की समस्याओं के आधार पर अपना निर्णय करता है, अन्य जगहों के आधार पर नहीं. सभी उम्मीद करते हैं कि हमारी पसंद की पार्टी जीते, लेकिन इस बात पर भी हम सहमत हो सकते हैं कि श्रीमान 5000 बोतल चुनाव में पराजित हों.

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