किसानों को नहीं मिल रहा उचित दाम

खरीफ फसलों में प्रमुख धान की कटाई हो गयी और किसान अपने छह महीने से भी अधिक की मेहनत को लेकर बाजार में पहुंच रहे हैं. सरकार कागजों में तो किसानों की उपज को उचित दाम देने का दावा करती दिखती है, लेकिन वास्तव में इन किसानों की मेहनत मंडियों में औने-पौने दामों में खरीदी […]
खरीफ फसलों में प्रमुख धान की कटाई हो गयी और किसान अपने छह महीने से भी अधिक की मेहनत को लेकर बाजार में पहुंच रहे हैं. सरकार कागजों में तो किसानों की उपज को उचित दाम देने का दावा करती दिखती है, लेकिन वास्तव में इन किसानों की मेहनत मंडियों में औने-पौने दामों में खरीदी जा रही है. पूंजीपति धान को औने-पौने दामों पर खरीद रहे हैं. इसका मूल कारण झारखंड के जिलों में क्रय केंद्र का नहीं खोला जाना है. खास कर देवघर में तो इसका खास अभाव देखने को मिल रहा है.
केंद्र सरकार के द्वारा धान का समर्थन मूल्य 1360 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि देवघर के बाजार समेत राज्य के अन्य जिलों के बाजारों में यह 1050 से लेकर 1150 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जा रहा है. इससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है. ऊपर से रोना यह भी है कि किसानों को ही मंडियों में आढ़त शुल्क आदि का भी भुगतान करना पड़ रहा है.
ध्यान देनेवाली बात यह भी है कि बाजारों में जगह-जगह देश में कुकुरमुत्ताें की तरह पैर पसारे मल्टीनेशनल कंपनियों के एजेंट गिद्ध की तरह नजरें गड़ाये बैठे हैं और किसानों के आते ही टूट पड़ते हैं. सबसे पहले वे किसानों से मोल-भाव करना शुरू कर देते हैं. दुकानों पर पहुंचने के पहले ही किसान इस कदर टूट गया होता है कि वह किसी तरह धान को बेच कर वहां से खिसकने में ही भलाई समझता है. सबसे बड़ी बात यह है कि पड़ोसी राज्य बिहार में धान की बिक्री के लिए राज्य सरकार की ओर से बाकायदा बिक्री केंद्र खोला गया है, जहां किसानों को धान का समुचित दाम मिल रहा है, लेकिन यहां किसानों के नाम पर राजनीति करनेवाले भी कहीं नजर नहीं आ रहे हैं.
प्रताप कुमार तिवारी, देवघर
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