आबादी घटाने का मोदी-सूत्र
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Dec 2014 6:32 AM (IST)
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सत्य प्रकाश चौधरी प्रभात खबर, रांची रेलवे बदहाल क्यों, सड़कों पर इतना जाम क्यों? क्यों मुसाफिर बस की छत पर और मरीज अस्पताल के फर्श पर? सवाल कोई भी हो, अंत में जवाब यही मिलेगा कि देश में आबादी बहुत बढ़ गयी है. यानी कि अच्छे दिन लाने हैं, तो आबादी घटानी होगी. आबादी घटाने […]
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सत्य प्रकाश चौधरी
प्रभात खबर, रांची
रेलवे बदहाल क्यों, सड़कों पर इतना जाम क्यों? क्यों मुसाफिर बस की छत पर और मरीज अस्पताल के फर्श पर? सवाल कोई भी हो, अंत में जवाब यही मिलेगा कि देश में आबादी बहुत बढ़ गयी है. यानी कि अच्छे दिन लाने हैं, तो आबादी घटानी होगी.
आबादी घटाने के कुछ आजमाये हुए तरीके हैं. पहला है इमरजेंसी के जमाने का, संजय गांधी वाला. यह तरीका मोदी जी के ‘मन की बात’ है, लेकिन डरते हैं कि कहीं वही अंजाम न हो जो इमरजेंसी के बाद चुनाव में कांग्रेस का हुआ था. न तीर से न तलवार से, ‘साहब’ डरते हैं तो बस हार से. इसलिए इस तरीके को न तो न. दूसरे तरीके के लिए न इतिहास में जाना है, न कांग्रेस से उधार लेना है.
यह ताजा-ताजा है और इसके जनक हैं मोदी जी की ही पार्टी के डॉ रमन सिंह. कहते हैं न, छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया. अब देखिए, झारखंड में मुख्यमंत्री भी एक छत्तीसगढ़िया चुन लिया गया है.
छत्तीसगढ़िया तरीका है, नसबंदी करानेवाली औरतों को चूहामार दवा खिला देना. भई सरकारी नसबंदी है, फेल भी हो सकती है. इसलिए न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी. सूत्रों के मुताबिक, छत्तीसगढ़िया भले खुद को सबसे बढ़िया कहें, पर मोदी जी को यह तरीका पसंद नहीं आया. दो वजहें हैं. पहली, आखिर कितनों की जान लेंगे, और दूसरी, इसमें बदनामी बहुत है. गुजरात दंगों वाला दाग छूटा भी नहीं है कि एक और लगा लें! फिर जो आदमी मैडिसन स्क्वायर, अल्फोंस ऐरेना में भाषण झाड़ आया हो, वह टुच्चे हिंदुस्तानी तरीके अपनायेगा! उसे तो वर्ल्ड बैंक, आइएमएफ और जगदीश भगवती जैसे अर्थशात्री तरीके बताते हैं.
इन सबकी साझा कोशिश से मोदी जी ने जो नया तरीका अपनाया है, वह है स्वास्थ्य बजट में 20 फीसद कटौती का. हमारा महान देश पहले ही जीडीपी का सिर्फ एक फीसद स्वास्थ्य पर खर्च करता है, अब और कम खर्च करेगा. सरकारी अस्पताल में जो सर्दी-बुखार की गोली किसी तरह मिल जाती थी, अब वह भी नहीं मिलेगी. इससे आबादी कम होगी. क्योंकि जिनकी जेब भारी नहीं है, वे इलाज नहीं करा पायेंगे और टें बोल जायेंगे. भारत भगवान भरोसे चलता है, इसलिए दोष सरकार पर नहीं आयेगा.
लोग कहेंगे कि भगवान की यही मर्जी थी, इसमें सरकार क्या करे. मोदी जी के इस नये तरीके से एक फायदा और होगा. गरीब मरेंगे तो गरीबी भी अपने आप कम हो जायेगी. इसके लिए गरीबी रेखा ऊपर-नीचे सरकाने की कलाबाजी नहीं करनी पड़ेगी. एड्स नियंत्रण के बजट में 30 फीसद कटौती की गयी है. अब आरएसएस की इतनी बात तो माननी ही पड़ेगी. किसी बत्र ने पोथी-पत्र देख कर बताया होगा कि एड्स पश्चिमी सभ्यता की देन है और यह नैतिक पतन से फैलता है. इसलिए, एड्स नियंत्रण पर खर्च घटेगा तो आबादी भी घटेगी और नैतिकता की रक्षा भी होगी. तो जनाब, कामसूत्र के देश में बोलिए मोदी-सूत्र की जय.
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