प्यार को प्यार ही रहने दो, कोई नाम न दो..

Published at :26 Nov 2014 2:59 AM (IST)
विज्ञापन
प्यार को प्यार ही रहने दो, कोई नाम न दो..

जीवन की आपाधापी में मैं इतनी गुम हो गयी थी कि अपनों को ही भुला बैठी थी. ऑफिस में काम के दौरान जब मेरे फोन की घंटी बजी, तो जैसे मेरी तंद्रा टूट गयी. मैंने फोन उठाया, देखा मेरे परम मित्र शर्मा जी फोन पर हैं. मैंने फोन रिसीव किया. दूसरी तरफ से आवाज आयी, […]

विज्ञापन

जीवन की आपाधापी में मैं इतनी गुम हो गयी थी कि अपनों को ही भुला बैठी थी. ऑफिस में काम के दौरान जब मेरे फोन की घंटी बजी, तो जैसे मेरी तंद्रा टूट गयी. मैंने फोन उठाया, देखा मेरे परम मित्र शर्मा जी फोन पर हैं. मैंने फोन रिसीव किया. दूसरी तरफ से आवाज आयी, कमाल है मैडम किस दुनिया में हैं? यहां मेरे साथ इतना कुछ हो गया और आप हैं कि एक बार सलामती तक जानने की कोशिश नहीं की. अरे ऐसे भी कोई दोस्ती करता है क्या? शर्मा जी से मुङो इस आक्रमण की उम्मीद नहीं थी, सो मैं ङोल नहीं पायी. फिर भी हिम्मत करके डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की.

मैंने पूछा हुआ क्या? मेरे इस सवाल पर तो शर्मा जी और भी बिदक गये? क्या हुआ? आप यह सुन लें कि अगर कभी भी आपका और मेरा दोस्ताना रहा है, तो अविलंब आप मुझसे भेंट करें, अन्यथा मैं यह मान लूंगा कि जो रिश्ता बोझ बन जाये, उसे तोड़ना बेहतर. शर्मा जी के इस हमले का जवाब देने की मुझमें हिम्मत नहीं थी, तो मैंने सरेंडर कर दिया और उनसे कहा मैं ऑफिस से सीधे आपके घर पहुंचती हूं.

शर्मा जी के साथ दोस्ती दावं पर थी, मैं अनिष्ट की आशंकाओं से घिरी ऑफिस से तेज कदमों से निकली. इच्छा हो रही थी कि खास पंख होते, तो उड़ कर सीधा शर्मा जी के घर पहुंच जाती. लेकिन ऑटो के अलावा कोई उपाय नहीं था. मैं लगभग 45 मिनट में शर्मा जी के सामने हाजिर थी. मुङो देखते ही वे सहानुभूति की आस में मेरा हाथ थाम कर फफक पड़े. मैंने उनके आंसू बहने दिये,उन्हें जी हल्का करने का पूरा अवसर दिया. फिर उनसे पूछा, क्या हुआ शर्मा जी आप इतने परेशान क्यों हैं. इसपर वे बोले लोगों ने मेरा जीना हराम कर दिया है. आप तो मेरे जीवन के हर पहलू से वाकिफ हैं, किस तरह जवानी में लोगों ने मेरे प्यार की बलि ली. आज भी दिल के कोने में उसकी छवि मैं चिपकाये बैठा हूं.

वह जीवन में हमेशा मेरी प्रेरणा बनी रही. लेकिन आज, लोग मेरी उस प्रेरणा को ही छीन लेना चाहते हैं. मैं अब समझी कि शर्मा जी की दुखती रग पर लोगों ने हाथ रख दिया है. मैंने उनसे कहा, ठीक है, तो प्यार को प्यार ही रहने दीजिए न. अब गड़े मुर्दे उखाड़ने का क्या फायदा. मेरी बात पर शर्मा जी और नाराज हो गये. अरे, मैं गड़े मुर्दे उखाड़ रहा हूं, मैं तो ताजमहल में उसकी छवि देख जीवन भर प्रेरणा लेता रहा हूं. लेकिन अब यह आजम खां साहब हैं कि मेरी प्रेरणा को भी हथिया लेना चाहते हैं. एक तो मुझसे मेरी जिंदगी छीन ली और अब उसकी अंतिम यादें भी छीन लेना चाहते हैं.

अरे भाई शाहजहां ने अपना प्रेम प्रदर्शन करने के लिए ताजमहल बनवाया था, न कि धर्म को बढ़ावा देने के लिए. फिर ताजमहल से वक्फ बोर्ड का क्या लेना-देना. कितने प्रेमी चांदनी रात में ताजमहल को देख प्यार की कसमें खाते हैं अब उन कसमों पर भी राजनेताओं का कब्जा होगा क्या? शर्मा जी का दुख मुझसे देखा नहीं जा रहा था लेकिन सांत्वना के लिए शब्द भी नहीं मिल रहे थे. इन राजनेताओं को तो अपनी राजनीतिक रोटी सेंकनी होती हैं उन्हें भावनाओं को ठेस पहुंचने से क्या मतलब..

रजनीश आनंद

प्रभात खबर, रांची

rajneesh.anand@prabhatkhabar.in

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola