हरियाणा में 46, तो यहां 66 क्यों नहीं

Published at :23 Nov 2014 3:57 AM (IST)
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हरियाणा में 46, तो यहां 66 क्यों नहीं

भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहारे विधानसभा चुनाव में उतरी है. लोकसभा चुनाव में किला फतह कर मोदी ने लहर पैदा कर दी है, लेकिन विधानसभा चुनाव में चुनौतियां गंभीर हैं. विपक्षी पिछले आठ वर्ष के भाजपा के शासन को मुद्दा बना कर घेर रहे हैं. ऐसे में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ रवींद्र राय […]

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भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहारे विधानसभा चुनाव में उतरी है. लोकसभा चुनाव में किला फतह कर मोदी ने लहर पैदा कर दी है, लेकिन विधानसभा चुनाव में चुनौतियां गंभीर हैं. विपक्षी पिछले आठ वर्ष के भाजपा के शासन को मुद्दा बना कर घेर रहे हैं. ऐसे में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ रवींद्र राय के सामने चुनौती और बढ़ गयी है. प्रभात खबर के वरीय संवाददाता सतीश कुमार ने उनसे वर्तमान राजनीतिक हालात पर विस्तार से बातचीत की. प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश.

झारखंड विधानसभा चुनाव का आगाज होने जा रहा है. भाजपा की क्या स्थिति है?

भाजपा की स्थिति बहुत अच्छी है. पहले चरण में 13 विधानसभा में चुनाव होनेवाले हैं. अभी किसी भी पार्टी के नेता से पूछ लें, वे यही कहेंगे कि उनकी लड़ाई भाजपा से है. भाजपा मानती है कि अगर दो तीन स्थान को छोड़ दिया जाये, तो कहीं उसके मुकाबले में कोई दल नहीं है. प्रथम चरण में 10 से अधिक सीटें भाजपा जीतेगी. पूरे चुनाव का जो परिदृश्य सामने आया है. इसमें देखने को मिल रहा है कि भाजपा को छोड़ कर सभी दल टूटे हुए हैं. कांग्रेस, झामुमो और राजद एक-दूसरे के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं. झाविमो अप्रासंगिक पार्टी हो गयी है. जनता की नजर में उसके राजनीतिक भविष्य पर प्रश्न चिह्न् लग गया है. झाविमो की सरकार बनाने का दावा खोखला साबित होगा. जनता अल्पमत की सरकार से ऊब चुकी है. भाजपा ही एक मात्र विकल्प है.

एग्जिट पोल के सव्रे में भाजपा बहुमत से दूर दिख रही है. क्या चुनाव के बाद फिर भाजपा दूसरे दल के साथ मिल कर सरकार बनायेगी?

देखिए यह चुनाव पूर्व के सव्रे हैं. अब तक चुनाव नहीं हुए हैं. मुङो लगता है कि जनता उस सव्रे को पार कर लेगी. महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव में सभी सव्रे फेल हो गये. झारखंड भाजपा के विचारधारा की जमीन है. 33 सीट हम पूर्व में जीतते रहे हैं. हरियाणा में जब 13 का उछाल 46 तक जा सकता है, तो मुङो पूरा विश्वास है कि झारखंड में भाजपा की सीट 33 से बढ़ कर 66 होगी.

क्या भाजपा में नेतृत्व का अभाव है कि केंद्र और राज्य के चुनाव नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लड़ा जा रहा है?

पहले भी हमारे नेता अटल बिहारी वाजपेयी थे. लालकृष्ण अडवाणी थे. भारत का इतिहास रहा है कि वह एक नेतृत्व के पीछे चला है. राम और कृष्ण से चाणक्य और चंद्रगुप्त के जमाने तक. भारत की एकात्मता का यही सूत्र है. वर्तमान में पूरा देश नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एकजुट है और उठ खड़ा हो गया है. मोदी जी का मिशन है कि देश का हर भाग विकसित होगा, तभी देश मजबूत होगा. तभी देश का विश्व में स्थान होगा. जहां तक झारखंड की बात है प्रदेश के विकास की असीम संभावनाएं है. झारखंड का विकास केंद्र के साथ जुड़ कर ही हो सकता है, क्योंकि यहां अकूत खनिज संपदा है, जिसका अधिकार केंद्र के पास है.

विपक्ष का आरोप है कि भाजपा पैसे के बल पर चुनाव जीतना चाहती है. इसमें कहां तक सचाई है?

भाजपा जनमत के आधार पर चुनाव जीतना चाहती है. जन सहयोग से चुनाव जीत रही है. पैसे की बदौलत तो वे चुनाव लड़ रहे हैं, जो सत्ता में स्वार्थी की तरह भागीदार बने हैं और चिपके हैं. कांग्रेस, झामुमो और राजद चुनाव अलग अलग लड़ रहे हैं, लेकिन सरकार में तीनों साथ हैं. सत्ता और साधन का दुरुपयोग यही लोग कर रहे हैं. जहां तक झाविमो का सवाल है, तो वो कांग्रेस की पालतू पार्टी है. भाजपा का वोट काटने के लिए कांग्रेस इसे जिंदा रखे हुए हैं.

जनता ने भाजपा के नौ साल का शासन देखा है. क्या अगले पांच साल भी भाजपा का यही शासन देखने को मिलेगा?

मैं नहीं मानता हूं कि नौ साल सरकार रही है. भाजपा के नेतृत्व में चली. लेकिन गंठबंधन की मजबूरियां और गंठबंधन की अड़चनें नीतिगत फैसलों में अड़चन थी. गंठबंधन चुनाव के बाद के थे. इसलिए सभी दल अपनी सोच के लिए स्वतंत्र थे. मजबूरी में बनायी गयी सरकार मजबूत निर्णय नहीं ले सकती है. इसलिए हम झारखंड में भाजपा की स्थायी और मजबूत सरकार चाहते हैं. अगली सरकार हम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अटल जी के सपनों को पूरा करनेवाली सरकार बनायेंगे.

टिकट बंटवारे में दूसरे दलों से आनेवाले नेताओं को प्राथमिकता दी गयी. इसको लेकर नेता, कार्यकर्ताओं का विरोध भी सामने आया. इसे आप कैसे देखते हैं?

चुनाव एक प्रकार का युद्ध होता है. युद्ध में कुछ रणनीति अपनायी जाती है. भाजपा ने पहली बार सभी सीटों पर तैयारी की थी. ऐसे पांच-छह स्थानों पर हमने कुछ मजबूत उम्मीदवार, जिन्होंने भाजपा के नेतृत्व और अनुशासन को स्वीकारा, उन्हें चुनाव में उतारा है. लेकिन अधिकतर सीटें कार्यकर्ताओं को दी गयी है. इसलिए चुनाव की इस रणनीति पर विरोधियों के होश उड़ गये हैं. हमारा लक्ष्य है झारखंड को मजबूत सरकार देना, उसके लिए जो जरूरी था पार्टी ने किया.

सीएम कौन तय करेगा, प्रदेश या केंद्रीय नेतृत्व?

भाजपा राष्ट्रीय पार्टी है. हमारा राष्ट्रीय नेतृत्व सक्षम है. विधायकों की भावनाएं समङोगा और निर्णय लेगा, जो निर्णय होगा उसे हम स्वीकार करेंगे.

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