नया वैश्विक परिवेश और मोदी की यात्राएं

Published at :19 Nov 2014 3:01 AM (IST)
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नया वैश्विक परिवेश और मोदी की यात्राएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शपथ-ग्रहण के छह महीनों के भीतर छह से ज्यादा देशों का दौरा असाधारण गतिशीलता का परिचय देता है. यह गतिशीलता तीव्र आर्थिक प्रगति को प्राथमिक मान कर देश में ढांचागत बदलाव लाने की दृष्टि से प्रेरित तो है ही, साथ ही इसमें बदले वैश्विक आर्थिक परिवेश का भी योगदान है. 21वीं […]

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शपथ-ग्रहण के छह महीनों के भीतर छह से ज्यादा देशों का दौरा असाधारण गतिशीलता का परिचय देता है. यह गतिशीलता तीव्र आर्थिक प्रगति को प्राथमिक मान कर देश में ढांचागत बदलाव लाने की दृष्टि से प्रेरित तो है ही, साथ ही इसमें बदले वैश्विक आर्थिक परिवेश का भी योगदान है.

21वीं सदी में वैश्विक व द्विपक्षीय संबंधों की प्राथमिकताएं नये सिरे से तय हो रही है. ऐसे में राष्ट्राध्यक्षों के साथ-साथ रक्षा, वित्त और विदेश मंत्रियों के लिए जरूरी हो गया है कि वे एक कुशल व्यापारिक दूत की तरह वैश्विक मंचों पर उपस्थिति जता कर विदेशी निवेश आमंत्रित करें, आतंकवाद विरोधी पहल में भागीदार बनें, जलवायु-परिवर्तन से लेकर खाद्य-सुरक्षा तक के मोरचे पर कूटनयिक और नीतिगत बातचीत में देशहित को ध्यान में रखकर संधि-समझौते करें. यानी विदेश नीति का क्षेत्र अब अर्थव्यवस्था और विकास के लक्ष्य के साथ मजबूती से बंधा है.

प्रधानमंत्री की हर विदेश यात्र इसकी तसदीक करती है और उनका आस्ट्रेलिया दौरा भी अपवाद नहीं है. इस दौरे में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के साथ बातचीत के प्रमुख मुद्दे की रूपरेखा बीते सितंबर महीने में ही स्पष्ट हो गयी थी, जब टोनी एबॉट भारत आये थे. माना गया था कि भारत व ऑस्ट्रेलिया के बीच ऊर्जा, शिक्षा, खनन, नौवहन, कृषि और आंतरिक सुरक्षा से लेकर सांस्कृतिक आदान-प्रदान तक के क्षेत्र में सहयोग की विपुल संभावनाएं हैं, पर उनका दोहन नहीं किया जा सका है.

मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्र में इसकी एक हद तक पूर्ति हुई है. ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एबॉट चाहते हैं कि भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया का मौजूदा 15 अरब डॉलर सालाना का व्यवसाय ज्यादा से ज्यादा बढ़े और मोदी चाहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया ‘मेक इन इंडिया’ में सहयोग करे. ऑस्ट्रेलिया हिंद महासागर में भारत की ताकत बढ़ता देखना चाहता है और भारत चाहता है कि आतंकवाद निरोधी गतिविधियों, मादक-द्रव्यों के अवैध व्यापार पर लगाम तथा सीमा-सुरक्षा संबंधी जरूरतों में दोनों देश सहयोगी हों. इन सरोकारों को ध्यान में रख कर कुछ समझौते भी हुए हैं. उम्मीद की जा सकती है कि आनेवाले दिनों में ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत के संबंध कौशल-निर्माण, सैन्य-सुरक्षा तथा ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में विशेष तौर पर मजबूत होंगे

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