पाक के ना-पाक इरादों पर लगे विराम

Published at :08 Oct 2014 6:02 AM (IST)
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पाक के ना-पाक इरादों पर लगे विराम

।। लोकनाथ तिवारी ।। (प्रभात खबर, रांची) मुंह में राम बगल में छुरी, की तरह पाकिस्तानियों का व्यवहार उजागर होता रहा है और हम सब्र का इम्तिहान देते रहते हैं. अब इस इम्तिहान की इंतिहा हो रही है. मिसाल देखिए कि ईद पर मिठाइयों के आदान-प्रदान को पाक ने ना कह कर अपने नापाक इरादे […]

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।। लोकनाथ तिवारी ।।

(प्रभात खबर, रांची)

मुंह में राम बगल में छुरी, की तरह पाकिस्तानियों का व्यवहार उजागर होता रहा है और हम सब्र का इम्तिहान देते रहते हैं. अब इस इम्तिहान की इंतिहा हो रही है. मिसाल देखिए कि ईद पर मिठाइयों के आदान-प्रदान को पाक ने ना कह कर अपने नापाक इरादे जाहिर कर दिये.

पंजाब के वाघा बॉर्डर पर भारत व पाकिस्तान के सैनिक ईद-बकरीद के दौरान एक-दूसरे को बधाई के साथ मिठाइयां भी देते-लेते हैं. इस बार यह परंपरा नहीं निभायी गयी. ऐसा कर पाक ने अपना असली लक्षण दिखा दिया है. सीमा पार से नागरिकों पर रात को गोले बरसानेवाली सेना दिन के उजाले में मिठाइयों का आदान-प्रदान करती, तो भारत की आम जनता को यह तमाशा ही लगता. अब तो दीपावली और स्वतंत्रता दिवस के दिन भी ऐसा नहीं किया जाये तो ही बेहतर है.

वाजिब वजह भी है. बकरीद से एक रात पहले पाकिस्तान ने हदें पार करते हुए रिहायशी इलाकों में जबरदस्त फायरिंग की, जिसमें पांच भारतीयों की मौत हो गयी और 35 जख्मी हैं. वहीं हमारे जवानों ने कुपवाड़ा के तंगधार से घुसपैठ की कोशिश कर रहे तीन आतंकियों को मार गिराया.

सीमाओं पर जिस पैमाने पर पाक की ओर से गोलाबारी शुरू की गयी है, उससे दोनों देशों के बीच मिठाइयों के आदान-प्रदान के बारे में सोचना भी बेकार है. हद तो यह है कि गोलाबारी रात को होती है, जिससे ग्रामीण न तो घरों से बाहर निकल सकते हैं और न ही अंधेरे में सुरक्षित स्थानों में शरण ले पाते हैं. पाकिस्तान की कोशिश है कि किसी तरह गोलाबारी की आड़ में आतंकियों को भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करा दे.

पाकिस्तान की बौखलाहट का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि संयुक्तराष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ ने कश्मीर पर बेतुका बयान दिया. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका सहित अन्य देशों को यह संदेश दिया कि आतंकवाद से किसी समस्या का समाधान नहीं निकल सकता. भारत-पाक के बीच समस्या का हल निकालने की कोशिश पहले भी की गयी. आगे भी होती रहेगी.

विडंबना यह है कि पाक के राजनेता ऐसा नहीं चाहते. पाकिस्तान में भारत विरोधी बयान देकर अपने देश की चौपट होती अर्थ व्यवस्था व बढ़ती बेरोजगारी से जनता का ध्यान भटकाने के लिए उनके पास और कोई चारा भी नहीं है. आतंकी गतिविधियों को प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से बढ़ावा देकर वे कई बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर नंगे हो चुके हैं. उनको अपनी जनता की भी परवाह नहीं है.

सीमा पार से गोलीबारी कर हमें परेशान करने की जुगत में वे शेर की पूंछ पर पैर रख रहे हैं. उनको भी यह बखूबी पता है कि भारतीय फौज अपने पर आ गयी, तो उनको उनके ही घर से खदेड़ कर दम लेगी. ऐसे में तो बस हम उस दिन का इंतजार ही कर सकते हैं. उसके पहले बस इतनी ही कामना है कि पाक नेताओं के नापाक व बीमार इरादों को सदबुद्धि की रामबाण औषधि मिल जाये. अन्यथा …

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