‘लव जेहाद’ से मोदी मिशन को नुकसान

Published at :22 Sep 2014 1:08 AM (IST)
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‘लव जेहाद’ से मोदी मिशन को नुकसान

भारत को खतरा बाहर से नहीं, बल्कि भीतर से है. भारतीय मुसलिम दुनिया के शायद सबसे कम अतिवादी मुसलिम हैं. संघ परिवार हिंदू धर्म को इसलामिक बनाने की कोशिश में है. वह भारत को बदहाल पाकिस्तान बनाना चाहता है. एक अजीब नजारा हमारे सामने है, जहां एक ‘आधुनिक’ प्रधानमंत्री सिर्फ विकास के बारे में बात […]

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भारत को खतरा बाहर से नहीं, बल्कि भीतर से है. भारतीय मुसलिम दुनिया के शायद सबसे कम अतिवादी मुसलिम हैं. संघ परिवार हिंदू धर्म को इसलामिक बनाने की कोशिश में है. वह भारत को बदहाल पाकिस्तान बनाना चाहता है.

एक अजीब नजारा हमारे सामने है, जहां एक ‘आधुनिक’ प्रधानमंत्री सिर्फ विकास के बारे में बात करते हैं, जबकि उनके सिपहसालार वोट पाने के लिए ‘गैर-आधुनिक’ धार्मिक आधार पर मतदाताओं को भयाक्रांत करने की कोशिश करते हैं. धर्म और राज्य का अलगाव आधुनिकता की एक विशिष्टता है, जिसमें धर्म आधुनिक व्यक्ति के निजी जीवन तक सीमित रहता है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों की ‘गैर-आधुनिक’ मानसिकता नरेंद्र मोदी के आधुनिक विकास के एजेंडे को पटरी से उतार सकती है. ये संगठन सार्वजनिक जीवन में हिंदुत्व के एजेंडे का लगातार प्रसार करते रहते हैं. इनकी हरकतों के नुकसान का पहला संकेत उत्तर प्रदेश के हालिया उप-चुनाव के नतीजों में दिखा है, जहां भारतीय जनता पार्टी 11 में से सिर्फ तीन सीटें ही जीत सकी है.

कई लोगों का मानना है कि भाजपा ने ‘लव जेहाद’ के अजीबो-गरीब मसले को उठा कर अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है. उत्तर प्रदेश के पार्टी अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने इस मुद्दे को हद से अधिक उछाल दिया और जब तक दिल्ली में बैठा पार्टी नेतृत्व उन्हें नियंत्रित करता, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. लव जेहाद और योगी आदित्यनाथ के अन्य भड़काऊ बयानों ने राज्य का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कर दिया और समाजवादी पार्टी ने मुसलिम समुदाय का रक्षक होने का दावा कर इस स्थिति का लाभ उठा लिया. भाजपा भूल गयी कि लोकसभा चुनाव में उसे राज्य की 80 सीटों में से 71 सीटों पर सुशासन और आर्थिक विकास के वादे पर जीत हासिल हुई थी, न कि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के आधार पर.

‘लव जेहाद’ शब्द भारतीय शब्दकोश में पहली बार 2009 में आया, जब केरल और कर्नाटक से कथित धर्मातरण की खबरें आ रही थीं. हिंदू राष्ट्रवादियों ने दावा किया था कि मुसलिम पुरुष भारत को भविष्य में मुसलिम बहुसंख्यक देश बनाने के इरादे से हिंदू स्त्रियों को लुभा कर विवाह कर रहे हैं और उनका धर्मातरण कर रहे हैं. केरल में दो मुसलिम युवकों की इस आरोप में गिरफ्तारी हुई थी कि उन्होंने दो गैर-मुसलिम लड़कियों से धर्म-परिवर्तन के उद्देश्य से शादी का वादा किया था. अदालत में इन लड़कियों ने इन युवकों के विरुद्ध बयान दिया था. एक ने बताया कि वह कॉलेज में पढ़नेवाले एक सहपाठी के प्रेम में पड़ कर उसके साथ भाग गयी थी. लेकिन, शादी करने के बजाय उसे और दूसरी लड़की को एक मुसलिम केंद्र पर ले जाया गया, जहां उन्हें इसलामिक अतिवादी बातें बतायी गयीं. केरल उच्च न्यायालय ने पुलिस से मामले की छानबीन करने का निर्देश दिया. पुलिस जांच में पाया गया कि धोखाधड़ी की छिटपुट घटनाएं तो हुई हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर धर्मातरण के षड़यंत्र का कोई सबूत नहीं है.

उत्तर प्रदेश में भी पिछले तीन महीनों में पुलिस को मिली ‘लव जेहाद’ की छह शिकायतों में से पांच में बलात धर्मातरण का कोई सबूत नहीं मिल सका है. राज्य के पुलिस प्रमुख एएल बनर्जी ने मीडिया को बताया है कि ‘अधिकतर मामलों में हमने पाया है कि हिंदू लड़की और मुसलिम लड़के के बीच प्रेम संबंध था और उन्होंने अपने अभिभावकों की मर्जी के बिना विवाह किया था’ तथा ‘ये मामले लव मैरिज के हैं, लव जेहाद के नहीं.’

मुङो तो यही लगता है कि लव जेहाद कुछ हिंदू राष्ट्रवादियों के अतिसक्रिय और अल्प आत्मविश्वासी कल्पनाशीलता की फंतासी है, जो यह सोचते हैं कि मुसलिम पुरुष बड़े पैमाने पर हिंदू स्त्रियों को प्रेमजाल में फांस कर उनका धर्मपरिवर्तन कराने को उद्यत हैं, ताकि भारत को मुसलिम बहुसंख्यक देश बनाया जा सके. चूंकि यह मात्र कल्पना की उपज है और मतदाता पूरी तरह से मूर्ख नहीं है, इसका परिणाम यह हुआ कि उप-चुनाव में भाजपा को वोटों का नुकसान हो गया. लेकिन ऐसी मूर्खताओं का असली खतरा यह है कि इससे मुसलिम समुदाय अलग-थलग पड़ सकता है और वह पाकिस्तान में बैठे अल-कायदा के मुखिया ऐमान अल-जवाहिरी और मध्य-पूर्व एशिया में सक्रिय इसलामिक स्टेट जैसे तत्वों की इसलामी अपीलों से प्रभावित हो सकता है. हमें ऐसे आतंकियों के प्रेमरहित जेहाद से चिंतित होना चाहिए, न कि संघ परिवार के काल्पनिक ‘लव जेहाद’ से.

इस काल्पनिक लव जेहाद के पीछे पितृसत्ता का गैर-आधुनिक विचार है, जिसकी मान्यता है कि स्त्रियां पुरुषों की संपत्ति हैं और उनकी रक्षा पुरुषों का कर्तव्य है. यह विचार लगभग सभी पारंपरिक धर्मो में है, लेकिन 21वीं सदी में स्त्रियों को संपत्ति मानना उनका सरासर अपमान है. ‘लव जेहाद’ स्त्रियों के प्रति नकारात्मक समझ की पैदाइश है कि वे जिम्मेवार नहीं हैं तथा उनके पास सोच-विचार की क्षमता नहीं है, और इसीलिए पुरुष को उनकी रक्षा करने की आवश्यकता है. अगर हम देश की आधी आबादी की फिक्र करते हैं, तो हमें इस तरह की पितृसत्तात्मक मानसिकता का विरोध करना होगा, जो स्त्रियों को अधीनस्थ करने की कोशिश करती है.

यह मानसिकता धर्मशास्त्रों की शिक्षा से हजारों वर्षो में बनी है. मनुस्मृति, त्रयंबक की स्त्रीधर्मपद्धति आदि ग्रंथ स्त्री-विरोधी विचारों से भरे पड़े हैं. यही वजह है कि पारंपरिक भारतीय परिवार बेटी के रजस्वला होते ही नैतिक रूप से परेशान हो उठता है. उसकी शादी की चिंता सताने लगती है और उपासना-उपवास का दौर शुरू हो जाता है. लेकिन कई लड़कियां कॉलेज में प्रेम भी करने लगती हैं, जिनकी परिणति प्रेम-विवाह के रूप में होती है. लव जेहाद की कल्पना से ग्रस्त संघ परिवार के कार्यकर्ता यह भूल जाते हैं कि हिंदू और मुसलिम के बीच विवाह संभवत: मानवीय इच्छा और रोमांस का परिणाम होता है. प्रेम विवाह करनेवाली युवती अपने मन से भी किसी के साथ जाने का निर्णय कर सकती है.

भारत को खतरा बाहर से नहीं, बल्कि भीतर से है. भारतीय मुसलिम दुनिया के शायद सबसे कम अतिवादी मुसलिम हैं, जिसका कारण भारत का लोकतंत्र और हिंदू धर्म की बहुलवादी परंपरा है. भारत का इसलाम भी उदार और सूफियाना है. संघ परिवार हिंदू धर्म को इसलामिक बनाने की कोशिश में है. वह भारत को बदहाल पाकिस्तान बनाना चाहता है. मोदी अगर विकास के अपने वादे को पूरा करना चाहते हैं, तो उन्हें इन प्रवृत्तियों पर रोक लगानी होगी.

गुरचरण दास

वरिष्ठ टिप्पणीकार

delhi@prabhatkhabar.in

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