ePaper

खतरा बनता ड्रोन

Updated at : 19 Nov 2019 7:58 AM (IST)
विज्ञापन
खतरा बनता ड्रोन

पिछले महीने छत्तीसगढ़ के माओवाद-प्रभावित बस्तर क्षेत्र में स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के शिविर के पास ड्रोन उड़ानों ने सुरक्षा-संबंधी चिंताएं बढ़ा दी हैं. ऐसी उड़ानें तीन दिन के भीतर चार बार देखी गयी थीं. हालांकि, सुरक्षाबलों को रिमोट-चालित ड्रोनों को देखते ही गिराने का निर्देश दे दिया गया है, पर इनसे बचाव के […]

विज्ञापन

पिछले महीने छत्तीसगढ़ के माओवाद-प्रभावित बस्तर क्षेत्र में स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के शिविर के पास ड्रोन उड़ानों ने सुरक्षा-संबंधी चिंताएं बढ़ा दी हैं. ऐसी उड़ानें तीन दिन के भीतर चार बार देखी गयी थीं.

हालांकि, सुरक्षाबलों को रिमोट-चालित ड्रोनों को देखते ही गिराने का निर्देश दे दिया गया है, पर इनसे बचाव के लिए न केवल संवेदनशील जगहों पर, बल्कि औद्योगिक ठिकानों और घनी आबादी के इलाकों में ठोस उपायों की जरूरत है.

दो महीने पहले ही सऊदी अरब के सबसे बड़े तेल संयत्रों पर 10 ड्रोनों के जरिये भयानक हमला हुआ था, जिससे उसकी उत्पादकता कुछ समय के लिए आधी हो गयी थी तथा इससे वैश्विक आपूर्ति पर भी नकारात्मक असर पड़ा था. शत्रु देशों, आतंकवादी गिरोहों और अपराधी तत्वों द्वारा अत्याधुनिक तकनीक और हथियारों का इस्तेमाल नयी बात नहीं है.

ऐसे में ड्रोन से होनेवाले हमलों के अंदेशे को खारिज करना या गंभीरता से नहीं लेना बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है. तैयारी की मौजूदा हालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि माओवादी हमलों की आशंका में हमेशा मुस्तैद रहने के बावजूद चार बार दिखे ड्रोन को गिराया या पहचाना नहीं जा सका. जांच से कुछ जानकारी मिलने की उम्मीद है.

हालांकि, भारत में बीते दिसंबर में ड्रोन नियमन की नीति तैयार हुई थी, पर अभी तक उसे ठीक से लागू नहीं किया जा सका है. इसके तहत ड्रोन व उसके चालक के पंजीकरण का प्रावधान है तथा उड़ान के लिए मंजूरी लेना जरूरी है. इस पूरी व्यवस्था को डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म के तहत संचालित करने का नियमन है. आम तौर पर रक्षा व निगरानी के लिए या फिर नागरिकों द्वारा शौकिया या तस्वीर उतारने के लिए ड्रोन काम में लाये जाते हैं.

देश में ड्रोनों की कुल संख्या का सही आकलन भी नहीं है. एक रिपोर्ट के मुताबिक बिना पंजीकरण के ड्रोनों की संख्या छह लाख से अधिक हो सकती है, जिनमें से अधिकतर आयातित हैं. भारत ड्रोनों का सबसे बड़ा आयातक देश है. खबरों की मानें, तो सरकारी एजेंसिया डिजिटल हवाई बाड़ लगाने और ड्रोन को निशाना बनानेवाली विशेष प्रकार की बंदूकें हासिल करने पर विचार कर रही हैं.

इन उपायों के साथ नीतिगत स्तर पर पहलकदमी इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि भविष्य में ड्रोन जैसे उपकरणों के इस्तेमाल में बहुत बढ़त की संभावना है. हमारे देश में ही खेती, इंफ्रास्ट्रक्चर, खनन और यातायात जैसे क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक के उपयोग पर शोध हो रहे हैं. ढुलाई के काम में भी ऐसी मशीनें लग सकती हैं.

इसकी उपयोगिता और व्यावसायिक क्षमता को बेहतर बनाने के लिए भी समुचित नीतियों की दरकार है. दो साल पहले तक संयुक्त राष्ट्र के नागरिक उड्डयन संगठन के 191 देशों में से 63 ने कुछ नियमन किया है, नौ देशों में नीतियां विचाराधीन हैं तथा पांच में ऐसी मशीनों पर पाबंदी है. उम्मीद है कि सरकार नये खतरों के मद्देनजर ड्रोनों के लिए जल्दी ही प्रभावी निर्देशों का निर्धारण करेगी.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola