पक्ष हो या विपक्ष,भाषा की मर्यादा नहीं भूलनी चाहिए

Updated at : 26 Sep 2019 6:54 AM (IST)
विज्ञापन
पक्ष हो या विपक्ष,भाषा की  मर्यादा नहीं भूलनी चाहिए

अगले साल बिहार में विधानसभा चुनाव होनेवाला है. इसको लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग शुरू हो गयी है. सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें भाषा की मर्यादा का ख्याल नहीं रखा जाता है. आलोचना का स्तर नीतियों पर आधारित नहीं होकर व्यक्तिगत हो जाता है. शब्दों की मर्यादा, परिष्कृत भाषा व […]

विज्ञापन
अगले साल बिहार में विधानसभा चुनाव होनेवाला है. इसको लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग शुरू हो गयी है. सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें भाषा की मर्यादा का ख्याल नहीं रखा जाता है. आलोचना का स्तर नीतियों पर आधारित नहीं होकर व्यक्तिगत हो जाता है.
शब्दों की मर्यादा, परिष्कृत भाषा व शालीनता का ख्याल नहीं रखने से सच्ची बात भी उपहास का केंद्र बन जाती है. इस पर कोई गंभीर नहीं होता है. नेताओं को चाहिए कि उनके शब्दों के उच्चारण मानक हिंदी के करीब रहे. यद्यपि यह संभव न भी हो तो प्रयास दिखना तो चाहिए. नेताओं में भी मेधा की कमी नहीं हैं. गांधी, जयप्रकाश नारायण, श्रीबाबू, अनुग्रह बाबू, जग जीवन राम, इसी धरती की तो उपज हैं.
मुकेश कुमार मनन, पटना
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola