वर्तमान के फेर में अतीत को न भूलें

वैश्वीकरण और आधुनिकीकरण की दौड़ में आज सबसे जयादा कोई देश प्रभावित हुआ है, तो वह है भारत. वैश्वीकरण की इस आंधी में आज भारत के सभी लोग पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण कर रहे हैं.इसकी वजह से आज हमारे देश की संस्कृति और परंपराओं का तेजी के साथ विनाश हो रहा है. खान-पान, रहन-सहन, वेश-भूषा, […]
वैश्वीकरण और आधुनिकीकरण की दौड़ में आज सबसे जयादा कोई देश प्रभावित हुआ है, तो वह है भारत. वैश्वीकरण की इस आंधी में आज भारत के सभी लोग पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण कर रहे हैं.इसकी वजह से आज हमारे देश की संस्कृति और परंपराओं का तेजी के साथ विनाश हो रहा है. खान-पान, रहन-सहन, वेश-भूषा, नृत्य-कला आदि के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखे जा सकते हैं. साथ ही आज भारतीय फिल्मों का निर्माण भी हमारी देसी संस्कृति के उच्च आदर्शो से दूर हो रहा है.
इसका जहर संस्कृति और समाज को आघात पहुंचा रहा है. साथ ही साथ, हमारे नाटकों, नृत्यों, प्राचीन कला-कौशल और हमारे संगीत को भी आघात पहुंचा रहा है. निबंधकार श्यामाचरण दुबे के शब्दों में- परंपरा अतीत को वर्तमान और वर्तमान को भविष्य से जोड़ती है. अत: इसे कभी न भूलें.
ओमप्रकाश प्रसाद, ई-मेल से
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




