मॉल में असुविधा की चकाचौंध

झारखंड के अलग राज्य बनते ही राजधानी रांची में मॉल कल्चर पूरे शबाब पर है. शहर के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, होटल, रेस्त्रां, मल्टीप्लेक्स की बढ़ती संख्या और उनकी सुविधाएं लोगों के समृद्ध होते जीवन स्तर को बयान करती हैं. यूं तो राजधानी बनने से पहले भी यहां शॉपिंग कॉम्प्लेक्स थे, लेकिन जो नये हैं वे लोगों […]
झारखंड के अलग राज्य बनते ही राजधानी रांची में मॉल कल्चर पूरे शबाब पर है. शहर के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, होटल, रेस्त्रां, मल्टीप्लेक्स की बढ़ती संख्या और उनकी सुविधाएं लोगों के समृद्ध होते जीवन स्तर को बयान करती हैं.
यूं तो राजधानी बनने से पहले भी यहां शॉपिंग कॉम्प्लेक्स थे, लेकिन जो नये हैं वे लोगों की सुविधा के ख्याल से ठीक हैं, जबकि पुराने शॉपिंग कॉम्प्लेक्स इस लिहाज से नये वालों से पिछड़ते नजर आ रहे हैं. ऐसे ही एक कॉम्प्लेक्स में जाना कड़वा अनुभव रहा. कार की पार्किग का शुल्क दो घंटे के लिए दस रुपया देना महंगा लगा.
आगे पता चला कि वहां लिफ्ट तो है, लेकिन वह कॉम्प्लेक्स के दुकानवालों के सामान ढोने के काम आ रहा है. ऐसे में हमें चौथे तल्ले पर सीढ़ियां चढ़ कर पहुंचना पड़ा. ऐसे मॉल्स संचालित करनेवालों से आग्रह है कि जनसुविधा का खयाल रखें.
सुजाता सिन्हा, रातू रोड, रांची
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




