कैमरे की निगरानी में हों पोस्टमार्टम

अक्सर यह सुनने को मिलता है किसी हिंसक वारदात में चिकित्सक ने पोस्टमार्टम दवाब में किया है या अमुक तथ्य को छिपाया गया है. कुछ वारदातों में तो शव को कब्र से निकाल कर दोबारा पोस्टमार्टम की बात होती है, लेकिन यह हमेशा संभव नहीं होता. हाल के दिनों में एक के बाद एक हुई […]
अक्सर यह सुनने को मिलता है किसी हिंसक वारदात में चिकित्सक ने पोस्टमार्टम दवाब में किया है या अमुक तथ्य को छिपाया गया है. कुछ वारदातों में तो शव को कब्र से निकाल कर दोबारा पोस्टमार्टम की बात होती है, लेकिन यह हमेशा संभव नहीं होता.
हाल के दिनों में एक के बाद एक हुई सामूहिक बलात्कार व हत्या की घटनाओं में पोस्टमार्टम करनेवाले चिकित्सकों पर ही उंगलियां उठने लगी हैं. जांच अधिकारी पर गड़बड़ी कर किसी बड़े अपराधी को बचाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गड़बड़ी करने के आरोप गाहे-बगाहे लगते रहते हैं.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट को ही आधार बना कर गुनहगारों को बचा लिया जाता है, लेकिन साक्ष्य के अभाव में चिकित्सक की ही बात को सही मानने की विवशता हो जाती है. ऐसे में अगर सीसी कैमरे की निगरानी में पोस्टमार्टम हो, तो गड़बड़ियां रोकी जा सकती हैं.
सुरेश गांधी, ई-मेल से
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