ब्रिक्स में प्रधानमंत्री की कूटनीति

Published at :19 Jul 2014 5:49 AM (IST)
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ब्रिक्स में प्रधानमंत्री की कूटनीति

।। डॉ गौरीशंकर राजहंस ।। पूर्व राजदूत एवं पूर्व सांसद प्रधानमंत्री के ब्राजील दौरे में सबसे अच्छी बात यह रही कि उनकी मुलाकात रूस के राष्ट्रपति पुतिन से हुई. प्रधानमंत्री ने पुतिन को यह विश्वास दिलाया कि भारत का बच्चा-बच्चा मानता है कि सारी दुनिया में रूस ही भारत का सबसे करीबी दोस्त है. ब्राजील […]

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।। डॉ गौरीशंकर राजहंस ।।

पूर्व राजदूत एवं पूर्व सांसद

प्रधानमंत्री के ब्राजील दौरे में सबसे अच्छी बात यह रही कि उनकी मुलाकात रूस के राष्ट्रपति पुतिन से हुई. प्रधानमंत्री ने पुतिन को यह विश्वास दिलाया कि भारत का बच्चा-बच्चा मानता है कि सारी दुनिया में रूस ही भारत का सबसे करीबी दोस्त है.

ब्राजील में अभी-अभी संपन्न हुए आर्थिक दृष्टि से उदीयमान पांच देशों का जो छठां शिखर सम्मेलन हुआ, वह कई दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण था. सबसे खास बात यह कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का दृष्टिकोण पूरी दृढ़ता से रखा. उन्होंने कहा कि विकास समावेसी होना चाहिए, जिससे समाज के सभी वर्ग लाभान्वित हों. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में तत्काल परिवर्तन किये जाने की आवश्यकता है, ताकि इनमें और देशों को प्रतिनिधित्व मिल सके, जिससे जमीनी हकीकत साफ झलक सके. मोदी ने दो टूक कहा कि आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.

भारत कई वर्षो से प्रयास कर रहा था कि विश्व बैंक और मुद्रा कोष पर निर्भरता कम करने के लिए ‘ब्रिक्स’ देशों द्वारा एक बैंक की स्थापना की जाये. अब नरेंद्र मोदी के प्रयास से वह सपना सफल हुआ. 100 अरब डॉलर की पूंजी से ‘ब्रिक्स बैंक’ की स्थापना हुई. इसका मुख्यालय चीन के शंघाई में होगा, परंतु नियंत्रण भारत के हाथों में होगा. इसके प्रेसिडेंट और सीइओ भारतीय होंगे. प्रधानमंत्री ने कहा कि इसकी स्थापना से विकासशील देशों में विकास के नये रास्ते खुल जायेंगे.

यह बैंक विकासशील देशों में ढांचागत परियोजनाओं को वित्तीय मदद देगा. इसके अतिरिक्त यह भी निर्णय किया गया गया कि एक ‘आपात निधि’ कोष बनाया जायेगा, जिससे यदि किसी सदस्य देश पर कोई आर्थिक संकट आये, तो उसे कोष से मदद की जा सके.

प्रधानमंत्री की ब्राजील यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह था कि उनकी चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से बात हुई. इस बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया कि चीन के राष्ट्रपति के साथ उनकी बड़ी सफल बैठक हुई है और दोनों नेताओं ने अनेक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक वक्तव्य जारी कर कहा कि दोनों पक्षों ने सीमा के मुद्दे का समाधान खोजने की जरूरत पर बल दिया. प्रधानमंत्री मोदी ने आपसी भरोसा एवं विश्वास बढ़ाने और सीमा पर शांति बरकरार रखने के महत्व पर बल दिया. उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि भारत और चीन सीमा विवाद को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझा लें, तो यह पूरे विश्व के लिए समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान की मिसाल स्थापित करेगा.

भारत और चीन के प्रतिनिधि पिछले कुछ वर्षो में प्राय: 20 बार सीमा विवाद पर चर्चा कर चुके हैं. परंतु इसका अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है. भारत का कहना है कि चीन ने भारत की 4 हजार किमी जमीन पर नाजायज तरीके से कब्जा कर रखा है, जबकि चीन इस बात को नहीं मानता है. यद्यपि चीन के राष्ट्रपति शी ने यह वायदा किया कि वे प्रयास करेंगे कि यह सीमा विवाद शीघ्रातिशीघ्र सुलझ जाये, परंतु पिछला अनुभव यह बताता है कि चीनी नेताओं के कहने और करने में जमीन-आसमान का फर्क होता है. प्रधानमंत्री मोदी के साथ चीनी राष्ट्रपति शी ने जिस गर्मजोशी से बात की उससे थोड़ी आशा तो अवश्य बनती है.

परंतु यह आशा कितनी फलीभूत होगी, यह अभी कहना कठिन है. शी ने भारत की मित्रता का महत्व बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी को कहा कि जब भारत और चीन मिलते हैं, तो पूरी दुनिया उसे देखती है.

राष्ट्रपति शी ने प्रधानमंत्री मोदी को चीन में होनेवाले ‘ओपेक’ सम्मेलन में भाग लेने के लिए भी आमंत्रित किया है. यह एक महत्वपूर्ण बात है. मोदी ने शी से कहा है कि मानसरोवर जाने में भारतीय श्रद्धालुओं को अपार कष्ट झे लना पड़ता है. इसलिए चीन उसके लिए एक और रास्ता खोल दे, जिससे भारतीय यात्राी सुविधापूर्वक वहां पहुंच सकें. शी ने वादा किया है कि वे पूरी गंभीरता से इसके समाधान का प्रयास करेंगे. अब देखना यह है कि सीमा-विवाद की तरह इसका समाधान कैसे और कब निकलता है. इसमें कोई संदेह नहीं कि चीन और भारत दोनों एशिया के नेतृत्व के लिए जी-जान से प्रयास कर रहे हैं. ऐसे में यह सोचना कि चीन भारत का परम मित्र हो जायेगा, अपने को अंधकार में रखने जैसा है. इस मामले में भारत को कोई पहल काफी संभल कर करनी होगी.

प्रधानमंत्री के ब्राजील दौरे में सबसे सुखद बात यह हुई कि उनकी मुलाकात रूस के राष्ट्रपति पुतिन से बहुत सौहार्दपूर्ण रही. प्रधानमंत्री ने पुतिन को यह विश्वास दिलाया कि भारत का बच्चा-बच्चा यह मानता है कि सारी दुनिया में रूस ही भारत का सबसे करीबी दोस्त है और मुसीबत के समय में हमेशा रूस भारत के साथ खड़ा रहा. पुतिन ने प्रधानमंत्री को यह विश्वास दिलाया कि भारत के साथ रूस की दोस्ती अक्षुण्ण रहेगी.

कुल मिला कर प्रधानमंत्री मोदी की ब्राजील यात्रा अत्यंत ही सफल रही. अब देखना यह है कि भूटान से जो उन्होंने विदेश नीति में एक सुखद परिवर्तन की शुरुआत की है, वे उसे आगे कहां तक लेकर जाते हैं.

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