ऐसे बयान दुर्भाग्यपूर्ण

वेद प्रताप वैदिक द्वारा कश्मीर मुद्दे पर दिया गया बयान दुर्भाग्यपूर्ण है. एक वरिष्ठ पत्रकार होने के नाते उन्हें देश की गरिमा का ख्याल रखना चाहिए. इसमें कोई संदेह नहीं कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और कश्मीर के अलग देश बनाने की बात निश्चित तौर पर निंदनीय है. ऐसा नहीं है कि कश्मीर […]
वेद प्रताप वैदिक द्वारा कश्मीर मुद्दे पर दिया गया बयान दुर्भाग्यपूर्ण है. एक वरिष्ठ पत्रकार होने के नाते उन्हें देश की गरिमा का ख्याल रखना चाहिए. इसमें कोई संदेह नहीं कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और कश्मीर के अलग देश बनाने की बात निश्चित तौर पर निंदनीय है.
ऐसा नहीं है कि कश्मीर की आजदी को लेकर ऐसा पहली बार कहा गया है, इससे पहले भी प्रशांत भूषण और अरुंधति राय जैसे लोग कश्मीर की आजदी की वकालत करते रहे हैं, जिसके लिए उनकी आलोचना भी हो चुकी है. लेकिन सरकार को भी ऐसे बयानों को लेकर सख्ती से पेश आना चाहिए, क्योंकि ऐसी बातों से विदेशों में कश्मीर को लेकर गलत संदेश जा रहा है. वैदिक जी ने एक अच्छी बात यह कही कि कश्मीर के लोगों को भी वही आजदी और सुविधाएं मिलनी चाहिए, जैसी देश के अन्य प्रांत के लोगों को मिलती हैं.
विवेकानंद विमल, पाथरौल, मधुपुर
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