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स्कर्टनुमा ड्रेस में फाइट

Updated at : 10 Jun 2019 6:48 AM (IST)
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स्कर्टनुमा ड्रेस में फाइट

आलोक पुराणिक वरिष्ठ व्यंग्यकार puranika@gmail.com उस पार्टी के अध्यक्ष ने कहा हम घणा संघर्ष करेंगे और उनकी अपनी पार्टी के नेता पंजाब से राजस्थान तक आपसी संघर्ष में जुट लिये. चुनाव के बाद सिर्फ संघर्ष और आग ही बची है, सूरज से भी बरसती हुई. उस टीवी चैनल की स्क्रीन के बैक ग्राउंड में आग […]

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आलोक पुराणिक
वरिष्ठ व्यंग्यकार
puranika@gmail.com
उस पार्टी के अध्यक्ष ने कहा हम घणा संघर्ष करेंगे और उनकी अपनी पार्टी के नेता पंजाब से राजस्थान तक आपसी संघर्ष में जुट लिये. चुनाव के बाद सिर्फ संघर्ष और आग ही बची है, सूरज से भी बरसती हुई. उस टीवी चैनल की स्क्रीन के बैक ग्राउंड में आग लगातार जलती रहती है, एंकर भयंकर अफरातफरी में इधर से उधर भागते दिखते हैं, एकैदम परम एक्टिव टाइप.
ओ भाई रुक ले, थोड़ा सब्र दिखा ले, बैठ कर बता ले. सामान्य ज्ञान की ऐसी बातें मैंने उस टीवी चैनल के अपने एक दोस्त से कही, उसने मुझसे पलट सवाल पूछ लिया- टीवी को जानते नहीं, फोकटी की बकवास किये जाते हो. टीवी यानी एक्शन, एक्शन दिखना चाहिए. एकैदम इधर से उधर, उधर से और उधर, कूदते हुए और डाइव लगाते हुए. डाइव लगाकर गिरते हुए, फिर उठते हुए. फिर उठ कर उछलते हुए. मैंने कहा- भाई खबर दिखा रहे हो, या सर्कस! उसने बताया- पूरी कोशिश सफल सर्कस दिखाने की ही है, बस हमेशा कामयाब न हो पाते.
एक्शन चाहिए, इस पर मैंने निवेदन किया- स्वर्गीय मनमोहन देसाई की पुरानी फिल्में देखो. तरह तरह के रोचक एक्शन दिखते हैं. उनकी एक फिल्म थी धर्मवीर- धर्मेंद्र और जीतेंद्र थे इसमें. धर्मेंद्र कुछ ऐसी ड्रेस पहनते थे जो स्कर्टनुमा लगती थी.
फिल्म देखकर समझ न आता था कि देश-काल कौन-सा है, पर धर्मेंद्र स्कर्टनुमा ड्रेस में ऐसी मारधाड़ मचाते थे कि पब्लिक मगन हो जाती थी. समझ में कुछ न आये, पर मगन हो जाना- यह बात कुछ कुछ आज के कुछ टीवी चैनलों के दर्शकों पर भी लागू होती है.
टीवी चैनल के स्टूडियो में अब मनमोहन देसाई की आत्मा के आह्वान की जरूरत है. दो अलग-अलग पार्टियों के प्रवक्ता हाथ में तलवार लेकर धर्मेंद्र की स्कर्टनुमा ड्रेस पहनकर आयें और जुट जायें, दे दनादन, दे दनादन. पब्लिक को पहलवानी की फाइट और खबरों का आनंद एक साथ ही आ जाये.
टीवी पर एक्शन तलाशनेवाले को एक सुझाव मैंने यह दिया कि दो मुखौटे बनवा लो, एक टॉम का, एक जैरी का. एक पार्टी प्रवक्ता टॉम हो जाये, दूसरा जैरी हो जाये.
टीवी स्टूडियो में उछल-कूद दिखवा दो. बच्चे भी देख लिया करेंगे राजनीतिक खबरों को, राजनीतिक डिबेट को. और, बच्चों को एक गंभीर संदेश भी मिल जायेगा कि इस खबरबाजी को उतना ही सीरियसली लिया जाना चाहिए, जितनी सीरियसता के साथ टॉम ऐंड जैरी के शो को लिया जाता है.
या शो को रोचक बनाने के लिए यूं भी हो सकता है कि तमाम पार्टी प्रवक्ताओं से निवेदन किया जाये कि बॉडी दिखाने के लिए बनियान वगैरह उतार दें, मसल्स दिखाते रहें और मौका मिले तो फ्री स्टाइल में एक दूसरे पर मुक्का जड़ दें. लतिया भी दें, मौका पाते ही. दे दनादन.
चैनल चीफ कह रहा है- आपके पास इतने बेहूदे आइडिया रहते हैं कि आपकी सही जगह तो टीवी चैनलों में है.
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