ताकि श्रद्धालुओं को असुविधा न हो

Published at :16 Jul 2014 3:33 AM (IST)
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ताकि श्रद्धालुओं को असुविधा न हो

सावन भर बाबाधाम में शिवभक्तों की भारी भीड़ जुटती है. यह हर वर्ष की बात है. पर इस बार पहली ही सोमवारी को शिवभक्तों पर यहां जिस कदर लाठियां बरसायी गयीं वह अचंभित करने वाली घटना है. घटना में एक दर्जन से अधिक कांवरिये घायल हो गये. इनमें बच्चे व महिलाएं भी शामिल हैं. सारी […]

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सावन भर बाबाधाम में शिवभक्तों की भारी भीड़ जुटती है. यह हर वर्ष की बात है. पर इस बार पहली ही सोमवारी को शिवभक्तों पर यहां जिस कदर लाठियां बरसायी गयीं वह अचंभित करने वाली घटना है. घटना में एक दर्जन से अधिक कांवरिये घायल हो गये. इनमें बच्चे व महिलाएं भी शामिल हैं. सारी प्रशासनिक व्यवस्था ध्वस्त हो गयी. प्रवेश कार्ड की व्यवस्था पूरी तरह फेल रही.

इस बार नयी व्यवस्था के तहत कांवरियों को प्रवेश कार्ड सिस्टम जारी किया गया. कांवरियों, जिनमें अधिकतर महिलाएं थी, उनके कार्ड में सुबह तीन से पांच बजे तक जलार्पण करने का समय अंकित था. लेकिन कांवरिये किसी भी तरह दिन के 10 बजे तक भी मंदिर में नहीं पहुंच पाये. इसी क्रम में एक वक्त ऐसा आया जब पंक्तिबद्ध कांवरियों में भगदड़ मच गयी. पुलिस ने भी स्थिति को संभालने के बजाये भीड़ पर लाठीचार्ज करना मुनासिब समझा. नतीजा यह हुआ कि महिला-बच्चों समेत कई श्रद्धालु पुलिस की लाठी से जख्मी हो गये. सावन की पहली सोमवारी पर अधिक भीड़ का अंदेशा पहले से ही था.

लेकिन जिला प्रशासन ने इसे हल्के में लिया. जिला प्रशासन ने महिलाओं और बच्चों की कतार की अलग व्यवस्था नहीं की. इस कारण यह अव्यवस्था की यह स्थिति बनी. शुक्र है कि मामला ज्यादा नहीं बिगड़ा और स्थिति जल्द ही संभल गयी. वरना इस भगदड़ में किसी महिला या बच्चे आदि की जानमाल की क्षति हो जाती तो इस धार्मिक स्थल पर क्या हो जाता इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. जरूरत इस बात की है कि राज्य सरकार इस घटना से सबक ले और जिला प्रशासन को सतर्क करे. ऐसा इसलिए भी आवश्यक है कि अभी पूरा सावन बाकी है.

सतर्कता से ही इस तरह की घटना की पुनरावृति रोकी जा सकती है. बात केवल श्रद्धालुओं की आस्था का नहीं है बल्कि यहां आने-जाने वाले लाखों लोगों की सुरक्षा का भी है. बाबाधाम से सरकार को भारी राजस्व भी प्राप्त होता है और इससे राज्य की एक पहचान भी है इसलिए भी सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वह इस आयोजन को गंभीरता से ले. यहां सुरक्षा और जनसुविधाओं का पूरा इंतजाम करे. साथ ही जलार्पण करने की प्रक्रिया को और सरल-सहज बनाये ताकि अव्यवस्था न हो.

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