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ट्रेड वार से नयी सरकार को मौका

Updated at : 21 May 2019 3:48 AM (IST)
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ट्रेड वार से नयी सरकार को मौका

डॉ जयंतीलाल भंडारी अर्थशास्त्री jlbhandari@gmail.com अमेरिका और चीन के बीच तेजी से बढ़ते ट्रेड वार के खतरों से भारत को बचाना नयी केंद्र सरकार की एक बड़ी चुनौती होगी. एक ओर चीन अपने उन उत्पादों को भारतीय बाजार में तेजी से भेजना चाहेगा, जिन पर अमेरिका में आयात शुल्क बढ़ गया है. वहीं दूसरी तरफ […]

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डॉ जयंतीलाल भंडारी
अर्थशास्त्री
jlbhandari@gmail.com
अमेरिका और चीन के बीच तेजी से बढ़ते ट्रेड वार के खतरों से भारत को बचाना नयी केंद्र सरकार की एक बड़ी चुनौती होगी. एक ओर चीन अपने उन उत्पादों को भारतीय बाजार में तेजी से भेजना चाहेगा, जिन पर अमेरिका में आयात शुल्क बढ़ गया है. वहीं दूसरी तरफ अमेरिका भी भारत के उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाकर भारत को ट्रेड वार की चपेट में ले सकता है.
ऐसे में जरूरी होगा कि केंद्र की सरकार भारत को ट्रेड वार के इन नये खतरों से बचाये और अमेरिका तथा चीन में निर्यात बढ़ने की नयी संभावनाओं के मौकों को मुट्ठी में लेने की नयी रणनीति बनाये.मोजूदा ट्रेड वार को देखते हुए अर्थ-विशेषज्ञ यह कह रहे हैं कि यद्यपि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वार से वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती बढ़ेगी, लेकिन अमेरिका और चीन में भारत से निर्यात बढ़ने की संभावनाओं के नये मौके भी निर्मित होंगे. वैश्विक स्तर पर यह अध्ययन रिपोर्ट पेश हुई है कि चालू वित्त वर्ष 2019-20 में अमेरिका-चीन के ट्रेड वार के कारण इन दोनों देशों में भारत से 3.5 फीसदी निर्यात बढ़ेंगे.
दरअसल, अमेरिका ने पिछले वर्ष जनवरी में चीन के कुछ उत्पादों पर आयात शुल्क लगातार व्यापार युद्ध की शुरुआत की. इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क लगा दिये. धीरे-धीरे ये दोनों देश एक-दूसरे से आयात होनेवाली कई वस्तुओं पर आयात शुल्क आरोपित करते गये. भारी हानि की आशंका को देखते हुए अमेरिका और चीन ने 24 अगस्त, 2018 के बाद लगातार समाधान वार्ता आयोजित की.
लेकिन, 10 मई तक इस वार्ता का कोई समाधान नहीं निकला और अमेरिका ने 10 मई से चीन से आयातित 200 अरब डॉलर की वस्तुओं पर शुल्क की दर मौजूदा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दी. इस पर 13 मई को चीन ने कहा कि वह 1 जून से अमेरिका से आयात होनेवाले 60 अरब डॉलर मूल्य की 5,140 वस्तुओं पर आयात शुल्क पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 25 फीसदी कर देगा.
यद्यपि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए उपयुक्त नहीं है, लेकिन भारत के लिए इन दोनों देशों में निर्यात बढ़ाने के जो मौके निर्मित हुए हैं. इससे देश का व्यापार घाटा कम करने में भी मदद मिलेगी. विदेश व्यापार विशेषज्ञों का मत है कि अमेरिका से चीन में अमेरिकी सामानों की आवक घटने पर भारत अब चीन को करीब सौ उत्पादों की आपूर्ति बड़े पैमाने पर कर सकता है.
इनमें तंबाकू, ताजा अंगूर, रबर, गोंद, ल्युब्रिकेंट्स, सोयाबीन, आॅयल, स्टील, कॉटन, बादाम, अखरोट, कृषि उत्पाद, विभिन्न रसायन आदि शामिल हैं. भारत संतरे, बादाम, अखरोट, गेहूं और मक्का का निर्यात दूसरे देशों को तो करता है, लेकिन चीन को नहीं करता. चीन इन चीजों को अमेरिका से खरीदता है.
अप्रैल 2019 में चीन के साथ द्विपक्षीय कारोबार में व्यापार घाटे को कम करने के लिए भारत ने 380 उत्पादों की सूची चीन को भेजी थी, जिनका चीन को निर्यात बढ़ाया जा सकता है. इनमें मुख्य रूप से बागवानी, वस्त्र, रसायन और औषधि क्षेत्र के उत्पाद शामिल हैं.
वर्तमान में चीन भारतीय उत्पादों का तीसरा बड़ा निर्यात बाजार है. वहीं चीन से भारत सबसे ज्यादा आयात करता है. दोनों देशों के बीच 2001-02 में आपसी व्यापार तीन अरब डॉलर था, जो 2018-19 में बढ़कर करीब 88 अरब डॉलर पर पहुंच गया
. पिछले वर्ष भारत से चीन को निर्यात बढ़कर 18 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो वर्ष 2017-18 में 13 अरब डॉलर था. इतना ही नहीं चीन से भारत का आयात भी 75 अरब डॉलर से कम होकर 70 अरब डॉलर रह गया. ऐसे में अमेरिका और चीन के ट्रेड वार के बीच भारत से चीन को निर्यात बढ़ने की संभावनाओं से भारत-चीन व्यापार घाटे में और कमी आयेगी.
ट्रेड वार के मोर्चे पर अमेरिका का सामना करने के लिए और भारत को अपने पक्ष में करने के लिए चीन करीब आता दिख रहा है. इसी तरह अमेरिका में चीनी उत्पादों पर आयात शुल्क संबंधी प्रतिबंधों के कारण अमेरिका में चीनी उत्पादों की आमद घट जायेगी. ऐसे में भारत अमेरिका में मशीनरी, इलेक्ट्रिकल उपकरण, वाहन, परिवहन कल पुर्जे, रसायन, प्लास्टिक, रबड़ जैसे उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्यात बढ़ा सकता है.
भारत अमेरिका को टेक्सटाइल, गारमेंट और जेम्स-ज्वैलरी का निर्यात भी बढ़ा सकता है. अमेरिका के लिए मेक्सिको के बाद चीन ऑटो पार्ट्स का दूसरा बड़ा सप्लायर है. कुछ अमेरिकी कंपनियां भारत से इन्हें खरीदने में रुचि दिखा रही हैं. यद्यपि अमेरिका को भारत के निर्यात की नयी संभावनाएं हैं, लेकिन यह जरूरी है कि भारत के अमेरिका के साथ व्यापार मतभेदों का उपयुक्त समाधान हो.
भारत का यह एक सराहनीय कदम है कि अमेरिका से आयातित, बादाम, अखरोट और दालें समेत 29 वस्तुओं पर भारत ने जवाबी शुल्क लगाने की समय-सीमा को लगातार आगे बढ़ाया है और अब यह सीमा 16 जून, 2019 तक है. ऐसे में भारत-अमेरिका के बीच कारोबारी तनाव को कम करने के लिए व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाना होगा.
ऐसा होने पर ही अमेरिका-चीन के ट्रेड वार का फायदा लेते हुए भारत अमेरिका को निर्यात में नये सिरे से वृद्धि कर सकेगा. हम आशा करें कि केंद्र में बननेवाली नयी सरकार भारत को एक ओर ट्रेड वार के खतरों से बचाने तथा दूसरी ओर अमेरिका और चीन में निर्यात बढ़ाने के लिए सुनियोजित रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी.
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