सामान्य नहीं नीरव की गिरफ्तारी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Mar 2019 6:49 AM

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अवधेश कुमार वरिष्ठ पत्रकार awadheshkum@gmail.com नीरव मोदी की लंदन में गिरफ्तारी भारत में प्रखर चर्चा का विषय नहीं बन पायी है. नीरव को बड़ा मुद्दा विरोधी दलों ने बनाया हुआ था. विरोधी दलों के लिए उसके पकड़े जाने की खबर राजनीतिक रूप से लाभदायक नहीं है कि उसके लिए वे वक्तव्य दें या पत्रकार वार्ता […]

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अवधेश कुमार

वरिष्ठ पत्रकार

awadheshkum@gmail.com

नीरव मोदी की लंदन में गिरफ्तारी भारत में प्रखर चर्चा का विषय नहीं बन पायी है. नीरव को बड़ा मुद्दा विरोधी दलों ने बनाया हुआ था. विरोधी दलों के लिए उसके पकड़े जाने की खबर राजनीतिक रूप से लाभदायक नहीं है कि उसके लिए वे वक्तव्य दें या पत्रकार वार्ता करें.

करीब 13,700 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले का आरोपी अगर गिरफ्तार हुआ है, तो उसके पीछे भारतीय जांच एजेंसियों का परिश्रम एवं सघन कूटनीतिक प्रयासों की ताकत है. बीते 20 मार्च को होलबोर्न मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तारी के बाद उसे वेस्टमिंस्टर न्यायालय में पेश किया गया था और भारत में आम प्रतिक्रिया यही थी कि उसे भी उसी तरह जमानत मिल जायेगी, जैसे विजय माल्या को मिल गयी थी. लेकिन नीरव की जमानत अर्जी खारिज हो गयी. ब्रिटेन जैसे देश के न्यायालय में जमानत न मिलना भी सामान्य घटना नहीं.

यह बात सही है कि मीडिया में नीरव मोदी के बारे में खबर आयी थी, जिसमें उसके घर से लेकर कारोबार तक की जानकारी थी. किंतु यह कहना गलत है कि खबर के बाद ही कार्रवाई हुई. प्रवर्तन निदेशालय एवं सीबीआई के पास उसके लंदन में होने की जानकारी आ गयी थी और प्रत्यर्पण की अपील की जा चुकी थी. प्रत्यर्पण की अपील पर ही ब्रिटेन के गृह मंत्री ने वहां के न्यायालय में कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दी.

ब्रिटिश सरकार ने पहले भगोड़े विजय माल्या और अब नीरव मोदी के खिलाफ जो कानूनी कार्रवाई की है उसके पीछे भारत की अनवरत कोशिशों को आप नकार नहीं सकते. प्रवर्तन निदेशालय का बयान था कि लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग की मदद से उस पर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है. नीरव मोदी की गिरफ्तारी के बाद स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने भी अपनी विज्ञप्ति में कहा कि उसको भारत के आग्रह पर लंदन के होलबॉर्न इलाके से गिरफ्तार किया गया है.

नीरव मोदी का पासपोर्ट जनवरी 2018 में ही रद्द कर दिया गया था. अब भगोड़ों के लिए विदेशों में काम करना आसान नहीं होगा, क्योंकि मोदी सरकार ने आर्थिक अपराधी विदेशी भगोड़ा संबंधी कानून काफी कड़ा बनाया है, जिसमें देश के अलावा विदेशों की संपत्तियां भी जब्त करने का प्रावधान है. इसके बाद से भगोड़ों के लिए कठिनाइयां बढ़ गयी हैं.

नीरव मोदी मामले को सामान्यतः पंजाब नेशनल बैंक घोटाला के नाम से जाना जाता है. पीएनबी की शिकायत मिलने के बाद 31 जनवरी, 2018 को मामला दर्ज किया गया था. विदेश में भले नीरव के खिलाफ पहली सफलता मिली है, देश के अंदर जितनी कार्रवाई संभव थी हुई है. सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय दोनों आरोप पत्र और पूरक आरोप पत्र दायर कर चुके हैं. मुंबई की विशेष अदालत में मामला चल रहा है.

प्रवर्तन निदेशालय प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएलएए) यानी हवाला कानून के तहत नीरव की 1,873.08 करोड़ और परिवार से जुड़ी 489.75 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर चुका है. निदेशालय ने मोदी की रोल्स रॉयस घोस्ट, पोर्श पनामेरा, मर्सिडीज-बेंज जीएलएस 350 सीडीआई, मर्सिडीज-बेंज सीएलएस, होंडा सीआर-वी, टोयोटा इनोवा और टोयोटा फॉर्च्यूनर वाहनों को जब्त किया था. न्यायालय ने इन महंगी कारों के साथ नीरव की कंपनी कैमलॉट इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड की 173 महंगी पेंटिगों की नीलामी की अनुमति भी दे दी है. इनका मूल्य लगभग 57.72 करोड़ रुपये है.

विशेष न्यायालय ने आयकर विभाग को भी नीरव मोदी की 68 अन्य पेंटिंग को बेचने की इजाजत दी है. आयकर विभाग का नीरव मोदी पर 95.91 करोड़ रुपये बकाया है. मुंबई से 90 किमी दूर रायगढ़ जिले के अलीबाग स्थित किहिम बीच पर 33 हजार वर्ग फीट में निर्मित नीरव के आलीशान बंगले को गिराया जा चुका है.

भारत में नीरव और उसके परिवार तथा मामले के आरोपियों की कोई संपत्ति छोड़ी नहीं गयी है. उन सबके खाते पहले ही सील हो गये थे तथा सारे आउटलेट पर ताले जड़े जा चुके हैं. नये कानून के आने के कारण ही जांच एजेंसियों को इतना अधिकार मिल पाया है.

यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या नीरव मोदी का प्रत्यर्पण हो सकेगा? विजय माल्या का मामला दो वर्ष से भारत लड़ रहा है, लेकिन अभी तक प्रत्यर्पण संभव नहीं हुआ है. ब्रिटेन के साथ प्रत्यर्पण संधि होने के बावजूद वहां की कानूनी प्रक्रिया जटिल है, जिससे विलंब होता है.

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद निचले न्यायालय ने माल्या के प्रत्यर्पण का आदेश दे दिया और वहां के गृह मंत्रालय ने भी प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर कर दिया है. माल्या उच्च न्यायालय जा चुका है. हालांकि उसने कह दिया है कि बैंकों की राशि लौटाने के लिए वह तैयार है. प्रवर्तन निदेशालय और भारतीय उच्चायोग ने ब्रिटिश अधिकारियों को दोनों मामलों का अंतर समझाया है. नीरव और माल्या के मामले में गुणात्मक अंतर है.

नीरव पर बैंकों के साथ धोखाधड़ी का आरोप है, जबकि माल्या पर कर्ज अदायगी न करने का. नीरव बड़े बैंकिंग घोटाले का सूत्रधार है. प्रशासन और कानून को धोखा देने के उद्देश्य से ही उसने साजिश रची और एलओयू तथा अन्य फर्जी कागजातों का इस्तेमाल कर भयानक धोखाधड़ी की. इस गुणात्मक अंतर को देखते हुए यह उम्मीद करनी चाहिए कि नीरव के प्रत्यर्पण में माल्या से कम समय लगेगा.

देश को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से परे कानूनी प्रक्रिया और भारत की क्षमता पर विश्वास रखना चाहिए. नीरव की संपत्ति जब्त हो ही चुकी है. आज नहीं तो कल उसका प्रत्यर्पण भी होगा.

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