नगर-निगमों की सूरत भी बदले

Updated at : 28 Jun 2014 1:47 AM (IST)
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नगर-निगमों की सूरत भी बदले

पटना नगर निगम के मेयर अफजल इमाम के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव तो गिर गया पर असली सवाल यह है कि काम की कसौटी पर किसी मेयर, किसी नगर निगम को कब तोला जायेगा? पंचायतों से लेकर नगरनिगमों तक राजनीतिक प्रतिद्वंदिता असामान्य घटनाएं नहीं हैं. लेकिन ये उठा-पटक किस बिना पर की जाती है, […]

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पटना नगर निगम के मेयर अफजल इमाम के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव तो गिर गया पर असली सवाल यह है कि काम की कसौटी पर किसी मेयर, किसी नगर निगम को कब तोला जायेगा? पंचायतों से लेकर नगरनिगमों तक राजनीतिक प्रतिद्वंदिता असामान्य घटनाएं नहीं हैं.

लेकिन ये उठा-पटक किस बिना पर की जाती है, इसका अहसास हमारे जनप्रतिनिधियों को है? यही वह सवाल है जहां से इन संस्थानों का मूल्यांकन किया जाना चाहिए.

आम नागरिकों की सुविधाओं, उनकी जरूरतों और शहरी क्षेत्र की संरचानाओं को बेहतर करने की जिम्मेदारी इन संस्थाओं पर है. बात सिर्फ पटना नगर निगम की नहीं हो रही है. ज्यादातर राज्यों के निगमों की दशा कमोबेश एक जैसी है. क्या बिहार, क्या झारखंड. इस सूरत को बदलने के लिए कोई मेयर और चेयरमैन राजनीति क्यों नहीं करते. शहरों की तादाद बढ़ती जा रही है. सभी एक तरह की परेशानी का सामना कर रहे हैं.

हवा-पानी दूषित हो रहे हैं. शहरों में प्रतिदिन जितना कचरा निकलता है उसका करीब आधा हिस्सा सड़कों और घर के बाहर खुले में फेंक दिया जाता है. नगर निगम उसके उठाव का इंतजाम नहीं कर पाया है. कचरे का प्रबंधन भारी समस्या बनी हुई है. उसके डंपिंग का कोई बंदोबस्त नहीं होना शर्मनाक नहीं है? निगम क्षेत्र में शुद्ध पेयजल-आपूर्ति की योजनाएं ऐसी नहीं बन पायीं जो हर घर में शुद्ध पानी का जरिया बन सके. इन नगरनिगमों की तसवीर कभी बदलेगी भी. शहरों में सार्वजनिक वॉश रूम नहीं होने से महिलाओं-लड़कियों को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता होगा, कहने की जरूरत नहीं.

बिहार-झारखंड की राजधानियों में फ्लोटिंग आबादी लाखों में है. इतनी बड़ी आबादी को सड़क के किनारे खड़ा होने की विवशता पार्षद कब महसूस करेंगे? कभी किसी पार्षद की ओर से यह शिकायत नहीं सुनने को मिलती कि शहर की हवा किस तरह जहरीली होती जा रही है. हजारों लोग सांस की बीमारी के शिकार हो रहे हैं. किसी भी शहर में गाड़ियों के पार्किगके इंतजाम नहीं हैं. बेशक, आपको राजनीति करने की छूट है, लेकिन यह राजनीति शहर को सुंदर बनाने के लिए हो तो जनप्रतिनिधि शायद आम लोगों का विश्वास भी जीत पायेंगे.

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