पर्यावरण पर नहीं बदल रही सोच

साल भर पहले बड़ी सजगता का परिचय देते हुए हमने पॉलीथीन का प्रयोग न करने का संकल्प लिया था. बड़े-बड़े पोस्टरों और होर्डिग पर करोड़ों खर्च किये गये थे. लेकिन एक साल बाद नतीजा सिफर दिख रहा है. बीती 5 जून को 40 डिग्री के तापमान में तपती रांची के एक एसी हॉल में झारखंड […]
साल भर पहले बड़ी सजगता का परिचय देते हुए हमने पॉलीथीन का प्रयोग न करने का संकल्प लिया था. बड़े-बड़े पोस्टरों और होर्डिग पर करोड़ों खर्च किये गये थे. लेकिन एक साल बाद नतीजा सिफर दिख रहा है. बीती 5 जून को 40 डिग्री के तापमान में तपती रांची के एक एसी हॉल में झारखंड राज्य प्रदूषण बोर्ड द्वारा पर्यावरण दिवस मनाया गया.
जानकार अच्छी जानकारियां दे रहे थे, पर आधे से अधिक श्रोता एसी की ठंडक में सोकर ही पर्यावरण दिवस मनाते रहे. संगोष्ठी के मध्य में भोजन का उत्तम प्रबंध देख एक श्रोता ने कहा कि पर्यावरण दिवस साल में एक ही बार क्यों होता है? मौसम वैज्ञानिकों से लेकर कॉरपोरेट घरानों के लोगों ने पर्यावरण के प्रति अपनी चिंता बड़ी भावनात्मक रूप से श्रोताओं के सामने रखी. एक पल को लगा कि शायद अब पर्यावरण के प्रति लोगों की सोच बदलेगी. लेकिन ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला.
सुधीर शर्मा, रांची
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