पटाखे जलाने से रुपये के साथ पर्यावरण को नुकसान
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Nov 2018 7:12 AM
दीपावली भारत वर्ष का बहुत ही पवित्र त्योहार है. दीपावली का शाब्दिक अर्थ है दीपों की अवली (पंक्ति). इसीलिए दीवाली की रात मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा है. दीवाली की रात लक्ष्मी-पूजन करने का विधान है. दीपावली बुराई पर अच्छाई की जीत का भी प्रतीक है. रोशनी के त्योहार के साथ पूजा, चमकते लैंप, […]
दीपावली भारत वर्ष का बहुत ही पवित्र त्योहार है. दीपावली का शाब्दिक अर्थ है दीपों की अवली (पंक्ति). इसीलिए दीवाली की रात मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा है. दीवाली की रात लक्ष्मी-पूजन करने का विधान है. दीपावली बुराई पर अच्छाई की जीत का भी प्रतीक है.
रोशनी के त्योहार के साथ पूजा, चमकते लैंप, नये कपड़े, मिठाई और पटाखे इस त्योहार का एक अनिवार्य हिस्सा है. परंतु दीपावली के दिन आतिशबाजी कर खुशी मनाने का तरीका गलत है, क्योंकि पटाखे अब हमारे देश की जलवायु को बुरी तरह प्रभावित करने लगे हैं. प्रतिवर्ष करोड़ों लोग अरबों रुपये के पटाखे जला देते हैं. इससे पैसे की बर्बादी तो होती ही है, वहीं इससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है.
हरिओम हंसराज, बसौता (सारण)
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