ePaper

मॉब लिंचिंग एक तमाचा

Updated at : 05 Oct 2018 7:39 AM (IST)
विज्ञापन
मॉब लिंचिंग एक तमाचा

मॉब लिंचिंग भारतीय लोकतंत्र के गाल पर तमाचा है. भीड़ द्वारा बर्बरतापूर्ण तरीके से किसी व्यक्ति की हत्या कर देने को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता. इस प्रकार कानून हाथ में लेकर लोग न्यायपालिका को चुनौती दे रहे हैं, जिस पर अभी तक भारतीय जनमानस का पूरा भरोसा कायम है. मॉब […]

विज्ञापन

मॉब लिंचिंग भारतीय लोकतंत्र के गाल पर तमाचा है. भीड़ द्वारा बर्बरतापूर्ण तरीके से किसी व्यक्ति की हत्या कर देने को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता.

इस प्रकार कानून हाथ में लेकर लोग न्यायपालिका को चुनौती दे रहे हैं, जिस पर अभी तक भारतीय जनमानस का पूरा भरोसा कायम है. मॉब लिंचिंग नैसर्गिक न्याय के भी खिलाफ है. भारतीय संविधान ने भी अपराधी को निष्पक्ष मुकदमे का हक प्रदान किया है. हालांकि 17 जुलाई 2018 को ही सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने केंद्र सरकार को इस पर कानून बनाने का आदेश दिया है.

साथ ही कई महत्वपूर्ण निर्देश भी दिये हैं. कोर्ट तो इस मसले पर गंभीर है, लेकिन क्या हमारा समाज इतना असभ्य, आक्रोशित, असंवेदनशील, हिंसक और बर्बर हो चुका है कि आज के युग में भी कुछ लोग मिलकर विभत्स तरीके से किसी की जान ले सकते हैं?

अलीरजा अंसारी, कैरो, लोहरदगा

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola