आर्थिक सेहत का इलाज हो

Updated at : 22 Sep 2017 9:34 AM (IST)
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आर्थिक सेहत का इलाज हो

वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने पहली बार माना कि अर्थव्यवस्था में गिरावट आयी है. नयी नौकरियां तो दूर, जो हैं, उसमें भी छंटनी के बादल मंडरा रहे हैं. औद्योगिक उत्पादन लगातार गिरावट पर है. निर्यात की तुलना में आयात ज्यादा हो रहा है. बैंकों की हालत खस्ताहाल है. नये पूंजी निवेश नहीं हो रहे. […]

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वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने पहली बार माना कि अर्थव्यवस्था में गिरावट आयी है. नयी नौकरियां तो दूर, जो हैं, उसमें भी छंटनी के बादल मंडरा रहे हैं. औद्योगिक उत्पादन लगातार गिरावट पर है. निर्यात की तुलना में आयात ज्यादा हो रहा है. बैंकों की हालत खस्ताहाल है. नये पूंजी निवेश नहीं हो रहे. बाजार में मांग की भारी कमी है.

विमुद्रीकरण एवं जीएसटी के चलते हमारी आर्थिक स्थिति दिन पर दिन खराब होती गयी. डॉ मनमोहन सिंह ने जब संसद में कहा था कि नोटबंदी से जीडीपी में 2% तक का गिरावट आयेगा, तब प्रधानमंत्री ने उनकी खिल्ली उड़ायी थी. अब जब सरकार ने भी मान लिया है कि आर्थिक सेहत ठीक नहीं है, तो आशा करनी चाहिए कि इलाज भी अविलंब शुरू होगा.

जंग बहादुर सिंह,गोलपहाड़ी
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