झारखंड की आदिवासी खिलाड़ी सुमराई टेटे में बहुत दम रहा है

Updated at : 07 Aug 2017 6:14 PM (IST)
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झारखंड की आदिवासी खिलाड़ी सुमराई टेटे में बहुत दम रहा है

-अनुज कुमार सिन्हा- झारखंड के लिए बड़ी खबर आयी है. एक आदिवासी हॉकी खिलाड़ी-काेच सुमराई टेटे काे ध्यानचंद लाइफटाइम अवार्ड मिलनेवाला है. अनुशंसा कर दी गयी है. देर से सही, झारखंड की इस आदिवासी खिलाड़ी के साथ कुछ न्याय ताे हुआ. काश, यह अवार्ड उसे पांच-सात साल पहले मिलता. हॉकी में पहली महिला खिलाड़ी है […]

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-अनुज कुमार सिन्हा-

झारखंड के लिए बड़ी खबर आयी है. एक आदिवासी हॉकी खिलाड़ी-काेच सुमराई टेटे काे ध्यानचंद लाइफटाइम अवार्ड मिलनेवाला है. अनुशंसा कर दी गयी है. देर से सही, झारखंड की इस आदिवासी खिलाड़ी के साथ कुछ न्याय ताे हुआ. काश, यह अवार्ड उसे पांच-सात साल पहले मिलता. हॉकी में पहली महिला खिलाड़ी है सुमराई, जिसे यह अवार्ड मिलने जा रहा है. 2016 में झारखंड के ही सिलवानुस डुंगडुंग काे इसी अवार्ड के लिए चुना गया था.

डुंगडुंग 1980 आेलिंपिक की उस टीम में थे जिसने अंतिम बार भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था. जिस समय सिलवानुस डुंगडुंग काे गत वर्ष ध्यानचंद अवार्ड देने की घाेषणा हुई थी, उस समय उनकी उम्र 68 साल की थी आैर मास्काे अाेलिंपिक के 36 साल बीत चुके थे. इतने विलंब से पुरस्कार देने से उसका आनंद कम हाे जाता है. जब खिलाड़ी काे पुरस्कार मिलता है तब उसे याद आता है कि वह ताे एक खिलाड़ी-काेच रहा है.

सुमराई के साथ भी ऐसा ही हुआ है. 1996 से 2006 तक वह हॉकी खेलती रही. उसके बाद वह काेच बन गयी. भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान भी रहीं. एक खासियत रही सुमराई में. उसने तय कर लिया था कि जब तक पुरस्कार नहीं मिलेगा, वह नाेमिनेशन के लिए आवेदन भेजती रहेगी, हार नहीं मानेंगी. इस साल भी उन्हाेंने नाेमिनेशन के लिए आवेदन भेजा था जाे अंतत: स्वीकृत हाे गया. कई सालाें से वह आवेदन जमा कर रही थी. नाम नहीं आ रहा था लेकिन निराश नहीं हुई थी. उनकी जगह काेई आैर खिलाड़ी हाेता ताे कब का हार मान चुकी हाेती.

सुमराई एक दमदार खिलाड़ी रही हैं आैर अपने नेतृत्व में कई प्रतियाेगिताएं जीती हैं. झारखंड का नाम भी इन्हाेंने आगे बढ़ाया है. एेसे देश की हॉकी में झारखंड का बड़ा याेगदान रहा है. झारखंड की मिट्टी ने अनेक राष्ट्रीय आैर अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिये हैं. जयपाल सिंह काे काैन भूल सकता है. लेकिन जब पुरस्कार पाने की बात आती है, झारखंड काे भुला दिया जाता है. दाे साल से झारखंड के दाे खिलाड़ियाें काे (एक पुरुष आैर एक महिला खिलाड़ी) काे जब ध्यानचंद लाइफटाइम अवार्ड के लिए चुना गया है ताे इसका असर यहां के खेल पर पड़ेगा.

खिलाड़ियाें का मनाेबल बढ़ेगा. गुमला, खूंटी, सिमडेगा की मिट्टी में ही हॉकी है. अगर इन जिलाें में हॉकी की सुविधा बढ़ायी जाये ताे देश काे अनेक खिलाड़ी ये जिले दे सकते हैं. पुरुष हॉकी में ताे अशाेक दीवान, चार्ल्स कार्नेलियस, धरम सिंह, हरदयाल सिंह, राजिंदर सिंह, सैयद अली, राेमियाे जेम्स, सिलवानुस डुंगडुंग जैसे अनेक खिलाड़ी रहे हैं जिन्हें ध्यानचंद लाइफटाइम पुरस्कार मिला है पर महिला हॉकी में सिर्फ एक नाम है सुमराई का. इसलिए इस सुमराई का सम्मान कीजिए. सुमराई टेटे का चयन एक उम्मीद जगाता है. झारखंड के अनेक पूर्व खिलाड़ियाें काे वह स्थान नहीं मिल पाया जिसके वे हकदार हैं. ऐसे पुरस्काराें से यह उम्मीद बनी है कि एक न एक दिन ऐसे तमाम खिलाड़ियाें काे उचित सम्मान मिलेगा.

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