धमकियां भी चाइनीज हुईं

आलोक पुराणिक वरिष्ठ व्यंग्यकार इन दिनों चीन में कुछ संवाद यूं होते होंगे- क्यों कर्नल साहब, आज की धमकी दे दी भारत को. आज तो अखबार की बारी है धमकाने की भारत को, हम तो एक दिन छोड़कर धमकी देते हैं. आज तो चीन का सरकारी अखबार-ग्लोबल टाइम्स धमकायेगा. पर कर्नल साहब आप भी धमकाते […]
आलोक पुराणिक
वरिष्ठ व्यंग्यकार
इन दिनों चीन में कुछ संवाद यूं होते होंगे- क्यों कर्नल साहब, आज की धमकी दे दी भारत को.
आज तो अखबार की बारी है धमकाने की भारत को, हम तो एक दिन छोड़कर धमकी देते हैं. आज तो चीन का सरकारी अखबार-ग्लोबल टाइम्स धमकायेगा. पर कर्नल साहब आप भी धमकाते रहा करो, क्या पता, ग्लोबल टाइम्स भूल जाये. धमकी देने में कई लेटलाली नहीं होनी चाहिए. इस काम में ढील होगी, तो कैसे काम चलेगा कर्नल साहब.
पर आज तो अखबार धमकायेगा, कल हम धमकायेंगे, परसों मंत्रीजी धमकायेंगे, फिर राष्ट्रपति धमकायेंगे, फिर प्रधानमंत्री धमकायेंगे, फिर रणनीतिक एक्सपर्ट धमकायेंगे.
पर कर्नल साहब, हम बस धमकाते ही रहेंगे क्या?
फिर धमकायेंगे, धमकाने के बाद फिर धमकायेंगे. फिर से दोबारा अखबार धमकायेगा, फिर कर्नल धमकायेगा, फिर मंत्री धमकायेगा, फिर राष्ट्रपति धमकायेंगे, फिर प्रधानमंत्री धमकायेंगे, फिर रणनीतिक एक्सपर्ट धमकायेंगे. और हम यहीं नहीं रुकेंगे, फिर तीसरी बार फिर चौथी बार, फिर पांचवी बार, फिर छठवीं बार, फिर सातवीं बार…
पर कर्नल साहब, ऐसे तो बेइज्जती खराब हो रही है. दो महीने से रोज धमकी हो रही है.धमकी भी काम है, हम इस काम को जोरदारी से कर रहे हैं. हम चाइनीज हैं, पर ये काम पक्का कर रहे हैं.पर कर्नल साहब ऐसे तो सब धमकी चाइनीज ही मानी जा रही है.कमाल है, चाइनीज धमकी चाइनीज मान ली जाये, तो हमें शर्म क्यों आनी चाहिए.
पर कर्नल साहब चाइनीज ब्रांड की बेइज्जती खराब हो रही है. एक पत्रकार ने लिखा है- चीन में हिंसक वारदातें होती ही नहीं होंगी, क्योंकि चीन में कोई भी धमकी पर अमल ही ना करता होगा. एक गुंडा दूसरे गुंडे को सिर्फ धमकाता होगा- देख लूंगा तुझे. फिर एक महीने के बाद कहता होगा- देख लूंगा. एकैदम अहिंसा मची रहती होगी, डोकोलम टाइप अहिंसा.नहीं ऐसा नहीं है, चीन में हिंसा-मारकाट होती है.
पर कर्नल साहब, फिर उस हिंसा को चाइनीज नहीं, अमेरिकन माना जाता होगा. असली हिंसा अमेरिकन होती होगी. अखबार चीन की बहुत मौज ले रहे हैं. इंडिया में चीन के लेवल की धमकी शिवसेना पार्टी देती है भाजपा को, लगभग रोज. शिवसेना की धमकियों को अब चाइनीज धमकियां माना जाने लगा है.
अच्छा, शिवसेना की धमकियां चाइनीज हैं, तो शिवसेना का हेडक्वाॅर्टर भी चाइनीज माना जाना चाहिए. हमें अब शिवसेना के हेडक्वार्टर के लिए भी धमकी देना शुरू कर देना चाहिए कि वह भी चाइनीज है.
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