पासपोर्ट तो बनवा लो

Updated at : 05 Jul 2017 6:30 AM (IST)
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पासपोर्ट तो बनवा लो

संतोष उत्सुक स्वतंत्र टिप्पणीकार विकास के मौसम की ताजा खबर यह है कि अब पचास किलोमीटर के दायरे में पासपोर्ट सेवा केंद्र खोले जायेंगे. देश की कुशाग्र व मेहनती प्रतिभाओं को दूसरे देशों में ‘अभी भी’ अपना भविष्य उज्ज्वल दिखायी देता है. खबर है कि सरकार ज्यादा गहराई से इस बात को समझने और केंद्र […]

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संतोष उत्सुक
स्वतंत्र टिप्पणीकार
विकास के मौसम की ताजा खबर यह है कि अब पचास किलोमीटर के दायरे में पासपोर्ट सेवा केंद्र खोले जायेंगे. देश की कुशाग्र व मेहनती प्रतिभाओं को दूसरे देशों में ‘अभी भी’ अपना भविष्य उज्ज्वल दिखायी देता है. खबर है कि सरकार ज्यादा गहराई से इस बात को समझने और केंद्र खोलने के लिए डाक घरों का अध्ययन कर रही है.
इस बारे में सरकारी स्कूलों में तो अध्ययन होना थोड़ा मुश्किल था, क्योंकि वहां तो पढ़ना मुश्किल है और पढ़ाना भी मुश्किल है. किसी को भी सरकारी पढ़ाई पर विश्वास नहीं है. ऐसे में हमारा विदेश मंत्रालय पासपोर्ट से जुड़ा महत्वपूर्ण अध्ययन वहां कैसे करा सकता था. सरकार ने ठीक ही किया और यह भी सोचा होगा कि शायद इसी बहाने डाक विभाग की स्पीड पोस्ट भी स्पीड से पहुंचने लग जाये.
खैर… असली बात तो विदेश जाने की है. दरअसल, हमारा विदेश प्रेम कम नहीं हुआ है, तभी तो विदेश जानेवालों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है. सरकार भी चाहती है कि इस तरीके से जनसंख्या कुछ तो कम हो, क्योंकि देश की सबसे बड़ी समस्या ही लोगों की भीड़ है.
इधर राजनीति करनेवालों की गिनती भी लगातार बढ़ रही है. राजनीति का चस्का ऐसा है कि लोग दुनिया के कोने-कोने में जाकर राजनीति करने लगते हैं. वहां सफल हो जायें, तो यहां राजनीति करने आ पहुंचते हैं. इसका एक बेहतरीन उदाहरण कनाडा का है. एक तेज दिमाग वाले व्यक्ति यह बता रहे थे कि एक दिन आयेगा, जब अपना पंजाबी कनाडा का पीएम बन जायेगा. खैर…
माफ करना बात पासपोर्ट की हो रही है. इसी संदर्भ में सरकार ने ‘नो इंडिया पोर्टल’ भी लांच कर दिया है. इस माध्यम से चल रहे ‘नो इंडिया प्रोग्राम’ के अंतर्गत, विदेशी भारत वंशियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों व मौजूदा टहनियों, जिन पर जातिवाद, असमानता और गैरजिम्मेवाराना राजनीति की विष बेलें फैल रही हैं, को देखने का मौका मिलेगा.
यहां कुछ शरारती लोग इस कार्यक्रम को ‘क्नो इंडिया प्रोग्राम’ भी बता रहे हैं. इस कार्यक्रम के तहत विदेश से लोगों को समूहों में लाया जाता है और यहां का ‘हरा-हरा’ दिखाया जाता है.
कहीं ऐसा तो नहीं कि भारतीय मूल के विदेशियों से यहां की ‘असली’ वर्तमान संस्कृति, ‘देश प्रेम’ से लबरेज माहौल व ‘सही’ लोग छुपाये जा रहे हैं. ऐसे में वह दिन दूर नहीं जब ज्यादा से ज्यादा जेबों में पासपोर्ट होंगे. जैसे अब हर एक के पास कई-कई सिम कार्ड मिलते हैं. विदेश जाकर अपने सपने पूरे कर सकें या नहीं, कम-से-कम विदेश जाने का सिम तो उनकी जेब में होगा ही.
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