बात फूलों की

Updated at : 30 Jun 2017 6:21 AM (IST)
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बात फूलों की

मिथिलेश राय टिप्पणीकार फूल आते हैं, तो वे एक देवदूत की तरह आते हैं कि जैसे अब पीछे से कोई उम्मीद आ रही है. जल्दी ही पेड़-पौधे फलों से लद जायेंगे. यह सच नहीं है कि फूलों का अपना एक मौसम होता है. फूल बारहो महीने खिला करते हैं. धूप के मौसम में भी और […]

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मिथिलेश राय

टिप्पणीकार

फूल आते हैं, तो वे एक देवदूत की तरह आते हैं कि जैसे अब पीछे से कोई उम्मीद आ रही है. जल्दी ही पेड़-पौधे फलों से लद जायेंगे. यह सच नहीं है कि फूलों का अपना एक मौसम होता है. फूल बारहो महीने खिला करते हैं. धूप के मौसम में भी और बारिश के मौसम में भी. बारिश के मौसम में कुमुदनी और शैवाल की छटा और निखरती जाती है. खेतों में धान में फूल आते हैं.

लेकिन यह मौसम तो धूप का मौसम है. धूप और बारिश के इस मौसम में पसीना देह पर राज करने लगता है और मन कभी भी भन्नाने लग जाता है. लेकिन, प्रकृति बड़ी कमाल की चीज है. इसने ताज्जुब की हजारों चीजें बो रखी है. जो आदमी को ऊब और हताशा से बचा कर धैर्य और मुस्कुराहट की दुनिया में ले जाती है.

अब अमलतास को ले लीजिये. जेठ-अषाढ़ की तमतमाई धूप में इसके गुच्छों पर जब भी नजरें पड़ती हैं, आदमी पसीने को बिसर जाता है. धूप तो जैसे हंसती-खेलती चीजों में कुंभलाने का बीज रोपने आती है, जबकि अमलतास के फूल इसी धूप में ताजा होकर खिलखिलाट बांटने खिलते हैं.

हां, अमलतास दुर्लभ है. यह सहज उपलब्ध नहीं है. इसके वृक्ष बहुतायत में कहीं नहीं पाये जाते. फिर भी कोई-न-कोई फूल हमारे इर्द-गिर्द हमेशा खिले रहते हैं. एक कारण तो यह हो सकता है कि फूल दुनिया की बदसूरती को ढंकने के लिए खिलते हैं या नहीं तो उम्मीद जगाने के लिए.

जैसे अमलतास के फूल और गुलमोहर के फूल मई-जून-जुलाई की धूप में खिलते हैं और एक मनोहर दृश्य जोड़ देते हैं. जिस फूल को सूंघ कर या देख कर हम मुग्ध हो जाया करते हैं, इससे इतर भी फूलों की एक दुनिया है, जहां पौधे में जब भी फूल आते हैं, तो चेहरे पर मुसकुराहट आ जाती है.

असल में वहां फूलों का मतलब उम्मीद से होता है. जैसे- झींगा के फूल या करैले के फूल. जैसे बैगन के फूल या भिंडी के फूल. हालांकि, धूप के इसी मौसम में मूंग में भी फूल आते हैं. सहसा एक दिन जब हमारी नजरें खुलती हैं, तो हम देखते हैं कि परवल की लता में फूल आने लगे हैं.

ये करैले के छोटे-छोटे नीले रंग के फूल कितना तो अद्भुत लगता है देखने में और बैगन के पौधे के फूल. झींगा (नेनुआ) के हरे-हरे पत्तों के बीच इनके पीले-पीले फूल कैसा तो दृश्य रच देता है वातावरण में. मिर्ची के नन्हे-नन्हें फूलों को निहारने के लिए उसके पास कुछ पल बैठना पड़ जाता है. धूप में भी खिल आये इन फूलों पर जब भी हमारी नजरें पड़ती हैं, तो आगे के दिन उम्मीद बन कर नाचने लगते हैं.

फूल इस वातावरण में सुगंध बन कर मिल जाने के लिए आते हैं, यह सच नहीं है. फूल हमारे लिए फल की सूचना लेकर आते हैं!

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