अमरीकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर जब पत्नी संग हरियाणवी रंग में रंग गए थे

By Prabhat Khabar Digital Desk
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<figure> <img alt="जिमी कार्टर और उनकी पत्नी रोजलीन दौलतपुर नसीराबाद में" src="https://c.files.bbci.co.uk/25C4/production/_110986690_u.s.embassyindia.png" height="700" width="976" /> <footer>FACEBOOK/U.S.EMBASSY INDIA</footer> <figcaption>जिमी कार्टर और उनकी पत्नी रोज़लिन हरियाणा के गांव में</figcaption> </figure><p>&quot;कार्टर साहब जब गांव आए तब उनको हरियाणवी पगड़ी पहनाई थी. उनकी पत्नी को घूंघट, पर्दा दिया था.&quot; गुरुग्राम से कुछ ही किलोमीटर दूर कार्टरपुरी गांव के निवासी आपको ऐसी यादें बार बार बता सकते हैं.</p><p>आपने दिल्ली और इसके पास चाणक्यपुरी, शारदापुरी, विकासपुरी और कल्याणपुरी जैसे इलाक़ों का नाम सुना होगा. लेकिन क्या आपने ऐसा सुना है कि भारत के किसी गांव का नाम किसी अमरीकी राष्ट्रपति के नाम पर हो?</p><p>गुरुग्राम के नज़दीक बसे हुए एक क़स्बे का नाम कार्टरपुरी है. अमरीकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर और इस गांव का एक पुराना रिश्ता है. इसी रिश्ते के कारण इस गांव का नाम कार्टरपुरी कर दिया है. </p><p>3 जनवरी 1978 को इस गांव में तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर अपनी पत्नी रोज़लिन कार्टर के साथ पहुंचे थे. आज इस गांव का पूरा नक्शा बदल गया है. गांव की पंचायत का नगर निगम में विलय हुआ है. लेकिन फिर भी 'कार्टरसाब' की और उनकी चर्चित यात्रा की यादें गांव के लोगों के ज़हन में आज भी हैं.</p><p>जिमी कार्टर की मां लिलियन कार्टर भारत में बतौर नर्स काम करती थीं. मुंबई में विक्रोली में उन्होंने काम किया था. कई लोग यह मानते हैं कि लिलियन कार्टर इस गांव में आती थीं. तब इस गांव का नाम दौलतपुर नसीराबाद था. अमरीकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने जब जनवरी 1978 में भारत की यात्रा की तब उन्होंने इस गांव की यात्रा करने की इच्छा जताई.</p><figure> <img alt="लिलियन कार्टर" src="https://c.files.bbci.co.uk/73E4/production/_110986692_lilan.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> <figcaption>लिलियन कार्टर मुंबई की गोदरेज कॉलोनी में मरीज़ों की सेवा करती थीं</figcaption> </figure><h1>जिमी कार्टर भेजते थे चिट्ठियां</h1><p>अगर आज आप कार्टरपुरी जाएंगे तो पुराने घरों की जगह नए घर दिखाई पडेंगे. गांव में पंचायत की बड़ी चौपाल (इमारत) दिखाई देगी. 32 साल पहले कार्टर की यात्रा के वक़्त मौजूद रहे लोगों में से बहुत ही कम लोग आज गांव में रहते हैं. </p><p>बहुत से लोग बाहर से आकर गांव के आसपास बसे हुए हैं. गांव में सभी तरह के दुकानें और एटीएम की सुविधा भी है.</p><p>चौपाल के सामने ही मोतीराम नाम के एक शख़्स चाय की दुकान चलाते हैं. जब कार्टर गांव में आए थे तब मोतीराम भी मौजूद थे. वो बताते हैं, &quot;उस दिन को हम नहीं भूल सकते. कार्टरसाब के गांव में आने से कई हफ़्ते पहले से ही गांव की सफ़ाई चल रही थी. तब चारों ओर खेत थे लेकिन अब खेत ख़त्म हो गए. अब सब जगह घर ही दिखाई देंगे. गांव में जाट, हरिजन, यादव, पंजाबी समुदाय के लोग रहते हैं.&quot;</p><figure> <img alt="कार्टरपुरी में चौपाल के सामने मोतीराम चाय की दुकान चलाते हैं" src="https://c.files.bbci.co.uk/11024/production/_110986696_20190925_135509.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> <figcaption>कार्टरपुरी में चौपाल के सामने मोतीराम चाय की दुकान चलाते हैं</figcaption> </figure><p>मोतीराम की दुकान के पास ही एक कपड़ों की दुकान अमर सिंह बघेल चलाते हैं. गांव के बुज़ुर्गों में से एक अमर सिंह बघेल कार्टरसाब की यात्रा पर बोलने से थकते नहीं. उस दिन बघेल खुद मौजूद थे. वे पंचायत के सदस्य भी रहे हैं. उनके पिता पूर्ण सिंह भी पंचायत के सदस्य रहे हैं.</p><p>अमर सिंह कहते हैं कि &quot;हम जिमी कार्टर को अपने गांव का सदस्य मानते हैं. उनके बहुत से पत्र पंचायत को आते थे और पंचायत भी उनको पत्र भेजती थी. लेकिन नगर निगम में विलय होने के बाद ये सिलसिला रुक गया.&quot; </p><figure> <img alt="मोरारजी देसाई ने जिमी कार्टर और रोजलिन का स्वागत किया था" src="https://c.files.bbci.co.uk/C204/production/_110986694_gettyimages-944218340.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> <figcaption>मोरारजी देसाई और अटलबिहारी वाजपेयी ने भारत दौरे पर जिमी कार्टर और रोज़लिन का स्वागत किया था</figcaption> </figure><h1>3 जनवरी को क्या हुआ था?</h1><p>कार्टर जब दौलतपुर नसीराबाद आए तो उनके साथ भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई, उनकी कैबिनेट के लोग और हरियाणा सरकार की लगभग पूरी कैबिनेट भी गांव आई. ऐसा अमर सिंह बताते हैं.</p><p>वो कहते हैं, &quot;उन्होंने गांव की पंचायत और पंचायत के पास में एक हवेली को भी देखा. कार्टर की अध्यक्षता में पंचायत की एक बैठक भी हुई थी. तब ये गांव गोद लेकर उसका विकास करने की इच्छा ख़ुद कार्टर ने जतायी थी. लेकिन मोरारजी देसाई ने कहा था कि इस गांव का विकास हम करेंगे.&quot;</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-51518570?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">जितने अमरीकी राष्ट्रपति अब तक भारत आए</a></li> </ul> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international/2015/08/150813_jimmy_carter_reveals_cancer_dil?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">मुझे कैंसर हैः जिमी कार्टर</a></li> </ul><figure> <img alt="कपडों की दुकान चलाते हैं अमर सिंह बघेल" src="https://c.files.bbci.co.uk/15E44/production/_110986698_20190925_141635.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> <figcaption>कपडों की दुकान चलाने वाले अमर सिंह बघेल कार्टर की यात्रा के वक़्त गांव में ही थे</figcaption> </figure><p>वो कहते हैं, ''रोज़लिन और जिमी कार्टर के गांव में आने से एक खुशी की लहर थी. हमारे गांव के इतिहास में वो एक सर्वोच्च पल था, उसको हम कभी नहीं भूल सकते. इसी कारण गांव का नाम भी लोगों ने कार्टरपुरी कर दिया.&quot;</p><p>&quot;रोज़लिन को गांव की औरतों ने घूंघट करना सिखाया. कार्टरसाब बीच-बीच में रोज़लिन का घूंघट उठाकर देखते थे. गांव के एक मोची ने उनको एक जोड़ी नरम और हल्की जूती भी भेंट की.''</p><h1>आज का कार्टरपुरी</h1><p>अमरीकी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई और तमाम मंत्रियों के आने के बाद गांव की तस्वीर बदल जाएगी, ऐसा गांव के लोगों को लगता था.</p><p>लेकिन गांव की स्थिति में कुछ ज़्यादा फ़र्क नहीं आया. आज भी यह महसूस किया जाता है. गुरुग्राम के दूसरे सेक्टर्स की तुलना में ये इलाक़ा पिछड़ा हुआ लगता है. नगर निगम में जाने के बाद भी उसका रूप ज़्यादा नहीं बदला. </p><figure> <img alt="कार्टरपुरी में पंचायत की बिल्ड़िंग" src="https://c.files.bbci.co.uk/1EBC/production/_110986870_20190925_142429.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> <figcaption>कार्टरपुरी में पंचायत की बिल्ड़िंग</figcaption> </figure><p>अमर सिंह कहते हैं, ''हमें उस दिन के बाद ऐसा कुछ मिला ही नहीं. हमारे गांव की सारी खेती चली गई और हमारे चारों ओर अब सेक्टर ही सेक्टर हैं. यहां पीने का पानी भी बहुत गंदा आता है. गांववाले प्रदूषण से जूझते रहते हैं. सरकार को हमारे गांव की लड़कियों के लिए अलग स्कूल बनाना चाहिए. शुरुआत से ही अंग्रेज़ी मीडियम स्कूल हमारे बच्चों के लिए चाहिए और 'आरओ' वाला पानी गांव को मिलना चाहिए.''</p><p>खेती ख़त्म होने के बाद गांव के लोग अब छोटा-मोटा काम करके गुज़ारा करते हैं. कोई रिक्शा चलाता है, कोई मज़दूरी करता है.</p><p>गुरुग्राम जैसे बड़े शहर में खोया हुआ यह गांव अपनी पुरानी यादें मन में दबाए हुए विकास की राह देख रहा है.</p><p><strong>यह भी पढ़ें-</strong></p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-51539296?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">क्या राज्यसभा में विपक्ष होने जा रहा और कमज़ोर?</a></li> </ul> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-50664592?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">हरियाणा के रोहतक में यूं 'ज़िंदा' हैं मराठा सेनापति सदाशिव राव भाऊ </a></li> </ul> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-50181225?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">हरियाणा विधानसभा में एक गांव के पांच विधायक</a></li> </ul><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम </a><strong>और </strong><a href="https://www.youtube.com/user/bbchindi">यूट्यूब</a><strong>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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