Yashwant Sinha: नौकरशाह से राजनेता और अब राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का ऐसा रहा है सफर

Presidential Candidate Yashwant Sinha: यशवंत सिन्हा ने 1984 में भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद वह राजनीति में आ गये. जनता पार्टी की सदस्यता ली और राजनीतिक करियर की शुरुआत की. वर्ष 1986 में उन्हें जनता दल का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया.
Presidential Candidate Yashwant Sinha: यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) भारतीय राजनीति का जाना-माना नाम हैं. भारतीय प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आये. अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) की सरकार में वित्त मंत्री और विदेश मंत्री जैसी अहम जिम्मेदारी संभाली. 6 नवंबर 1937 को संयुक्त बिहार की राजधानी पटना में जन्मे यशवंत सिन्हा (Who is Yashwant Sinha) का लंबा वक्त भारतीय जनता पार्टी के साथ बीता. भाजपा छोड़ने के बाद कई मंच से जुड़े और इस वक्त वह पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) में हैं. ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने ही विपक्षी दलों के उम्मीदवार के रूप में उनका नाम सुझाया.
चित्रगुप्तवंशी कायस्थ परिवार मे जन्मे यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha Latest News) ने वर्ष 1958 में राजनीति शास्त्र में मास्टर की डिग्री ली. 1960 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए. 24 वर्ष तक उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किये. 4 साल तक सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट और जिला मजिस्ट्रेट रहे. बिहार सरकार के वित्त मंत्रालय में 2 साल तक अवर सचिव तथा उप सचिव रहने के बाद उन्होंने भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय में उप सचिव के रूप में कार्य किया.
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यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha Twitter) ने वर्ष 1971 से 1973 के बीच बॉन (जर्मनी) के भारतीय दूतावास में प्रथम सचिव (वाणिज्यिक) रहे. 1973 से 1974 के बीच फ्रैंकफुर्त में भारत के कौंसुल जनरल रहे. विदेश में करीब 7 साल तक काम करने के बाद यशवंत सिन्हा बिहार सरकार के औद्योगिक आधारभूत सुविधाओं के विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर) और भारत सरकार के उद्योग मंत्रालय में काम किया. वर्ष 1980 से 1984 के बीच भारत सरकार के भू-तल परिवहन मंत्रालय में संयुक्त सचिव रहे.
यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha Profile) ने 1984 में भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद वह राजनीति में आ गये. जनता पार्टी की सदस्यता ली और राजनीतिक करियर की शुरुआत की. वर्ष 1986 में उन्हें जनता दल का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया. 1988 में यशवंत सिन्हा उच्च सदन यानी राज्यसभा के लिए चुने गये. वर्ष 1989 में जब जनता दल का गठन हुआ, तो उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया. चंद्रशेखर की सरकार में यशवंत सिन्हा नवंबर 1990 से जून 1991 तक वित्त मंत्री रहे.
बाद में यशवंत सिन्हा भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये. जून 1996 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया. मार्च 1998 में यशवंत सिन्हा को अटल बिहारी वाजपेयी ने देश का वित्त मंत्री बनाया. 22 मई 2004 तक संसदीय चुनावों के बाद नयी सरकार के गठन तक वे विदेश मंत्री रहे. हजारीबाग लोकसभा सीट से वह सांसद भी बने. 2004 में वह हजारीबाग सीट से हार गये. वर्ष 2005 में वह फिर संसद पहुंचे. 13 जून 2009 को उन्होंने भाजपा के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया.
पश्चिम बंगाल में वर्ष 2021 में विधानसभा चुनाव के दौरान यशवंत सिन्हा ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये. 13 मार्च 2021 ममता बनर्जी की मौजूदगी में वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए. ममता ने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया. उन्होंने उस वक्त कहा था कि यह कोई राजनीतिक लड़ाई नहीं है, लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है. उन्होंने कहा था कि देश दोराहे पर खड़ा है. न्यायपालिका समेत सभी संस्थानों को कमजोर किया जा रहा है.
अब ममता बनर्जी ने देश के सर्वोच्च पद के लिए उनका नाम आगे किया और 13 विपक्षी पार्टियों ने उसे स्वीकार कर लिया है. इस तरह अब वह राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बन गये हैं. वह 27 जून कोे दिन में 11:30 बजे नामांकन दाखिल करेंगे. यशवंत सिन्हा को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित करते हुए विपक्षी दलों ने कहा, ‘लंबे सार्वजनिक जीवन और प्रतिष्ठित करियर में यशवंत सिन्हा ने विभिन्न क्षमताओं- एक सक्षम प्रशासक, कुशल सांसद और प्रशंसित केंद्रीय वित्त और विदेश मंत्री के रूप में देश की सेवा की है. वह भारत के धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक ताने-बाने को बनाये रखने के लिए विशिष्ट रूप से योग्य हैं.’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने संयुक्त बयान में कहा कि हम भाजपा और उसके सहयोगियों से राष्ट्रपति के रूप में यशवंत सिन्हा का समर्थन करने की अपील करते हैं, ताकि हम एक योग्य ‘राष्ट्रपति’ को निर्विरोध निर्वाचित कर सकें. बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए कायम हुई विपक्षी दलों की एकता आने वाले महीनों में और मजबूत होगी. उल्लेखनीय है कि यशवंत सिन्हा का नाम शरद पवार, गोपालकृष्ण गांधी और फारूक अब्दुल्ला द्वारा राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने की पेशकश को ठुकराये जाने के बाद सामने आया.
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