Worship Act: CJI बोले- सुनवाई तक कोई नया मंदिर-मस्जिद विवाद दाखिल नहीं होगा, SC ने केंद्र से मांगा हलफनामा

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 12 Dec 2024 4:01 PM

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नीरज सिंह हत्याकांड में फैसला 27 अगस्त को.

Worship Act: वर्शिप एक्ट पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़ी सुनवाई हुई. जिसमें कोर्ट ने केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है और सुनवाई तक नये केस पर रोक लगाया है.

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Worship Act पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा, जब तक वह पूजा स्थल अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई नहीं कर लेता और उनका निपटारा नहीं कर लेता, तब तक देश में कोई और मंदिर-मस्जिद मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता. कोर्ट अब इस मामले में 4 हफ्ते बाद सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने पूजा स्थलों के खिलाफ नए मुकदमों के पंजीकरण पर रोक लगा दी है. वहीं लंबित मुकदमों में अंतिम/सर्वेक्षण आदेश पारित करने पर भी रोक लगा दी है.

कोर्ट ने केंद्र सरकार से हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा

सुप्रीम कोर्ट ने वर्शिप एक्ट पर सुनवाई करते हुए कहा, केंद्र के जवाब तक सुनवाई नहीं होगी. कोर्ट ने केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. साथ ही कहा कि जवाब की कॉपी सभी याचिकाकर्ता को दें. सीजेआई संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ इस मामले में सुनवाई कर रही है.

कोर्ट ने हलफनामा दाखिल करने के लिए दिया 4 हफ्ते का वक्त

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार सहित सभी याचिकाकर्ताओं को हलफनामा दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते का समय दिया है.

आप मेरे ऊपर छोड़ दीजिए

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा, आप मेरे ऊपर छोड़ दीजिए. कोर्ट ने कहा, कई मामले यहां विचाराधीन हैं. हमारे पास रामजन्मभूमि फैसला भी है. कई मुद्दे उठाए गए हैं, हम विचार करेंगे.

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कोई यह देखकर यह नहीं बता सकता कि कौन मंदिर है और मस्जिद

Places of Worship Act-1991 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा, “अपोजिट पक्ष ने कहा है कि देशभर में एक 18 स्थान हैं, जहां पर सर्वेक्षण कराने का जो आदेश दिया गया है, उसे रोक दिया जाए. हमने इसका विरोध किया क्योंकि Places of Worship Act 1991 धार्मिक चरित्र की बात करता है. धार्मिक चरित्र को सिर्फ देखकर परिभाषित नहीं किया जा सकता. कोई भी व्यक्ति सिर्फ देखकर यह नहीं बता सकता कि यह (कोई स्थान) मंदिर है या मस्जिद. सर्वेक्षण अवश्य होना चाहिए. बाबर, हुमायूं, तुगलक, गजनी और गौरी के अवैध काम को वैध बनाने के लिए कोई कानून नहीं बनाया जा सकता. यह कानून पूरी तरह से भारत के संविधान के खिलाफ है.”

क्या है वर्शिप एक्ट?

1991 में कांग्रेस सरकार एक कानून लेकर आई थी, जिसे प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट कहा जाता है. इस एक्ट के अनुसार 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धार्मिक स्थल को दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता है. इसमें सजा का भी प्रावधान था. उल्लंघन करने वाले को तीन साल जेल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है. इस एक्ट को हिंदू पक्ष ने संशोधित करने की मांग की है, जबकि मुस्लिम पक्ष ने संशोधन का विरोध किया है.

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लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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