Darul Uloom Deoband: अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मुत्तकी क्यों गए देवबंद? क्या है दारुल उलूम से क्या है कनेक्शन
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 11 Oct 2025 8:56 PM
अमीर खान मुत्तकी और अरशद मदनी
Darul Uloom Deoband: भारत दौरे पर आए अफगाानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी शनिवार को उत्तर प्रदेश के देवबंद स्थित इस्लामिक मदरसा दारुल उलूम पहुंचे. दारुल उलूम में नमाज पढ़ने के बाद मुत्तकी ने लोगों से मुलाकात भी की. तालिबानी सरकार के मंत्री गुरुवार को 6 दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचे हैं.
Darul Uloom Deoband: दारुल उलूम का दौरा करने के बाद अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने मीडिया के साथ बीतचीत में कहा, “देवबंद में सभी लोगों द्वारा किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत और मुझ पर बरसाए गए प्यार के लिए मैं आप सभी का आभारी हूं. मैं ईश्वर से प्रार्थना करूंगा कि भारत-अफगानिस्तान के रिश्ते और बेहतर हों. दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद, मैं कह सकता हूं कि हमारा भविष्य उज्ज्वल है. मुझे उम्मीद है कि दिल्ली और काबुल के बीच हमारी मुलाकातें बढ़ेंगी.”
दारुल उलूम क्यों गए आमिर खान मुत्तकी?
दारुल उलूम इस्लामिक शिक्षा के सबसे बड़ा केंद्र है. देवबंद में इसकी स्थापना 1866 में हुई थी. आजादी की पहली जंग 1857 के बाद अंग्रेंजों ने मुस्लिम संस्थानों और शिक्षा के केंद्र को बंद कर दिया और विद्वानों को मार डाला. जो कुछ इस्लामिक विद्वान बच गए, उन्होंने ही देवबंद में दारुल उलूम की स्थापना 30 मई 1866 को की थी. देवबंद का अफगाानिस्तान और खासकर तालिबानियों से खासा लगाव है. उनके लिए दारुल उलूम का काफी सम्मान है. कई तालिबानी नेताओं ने दारुल उलूम हक्कानिया में शिक्षा ली है. जो की पाकिस्तान के अकोरा में है. इसकी स्थापना 1947 में शेख अब्दुल हक ने की थी. शेख अब्दुल हक ने देवबंद के दारुल उलूम में शिक्षा प्राप्त की थी. बंटवारे के बद देवबंद के कई अनुयायी दुनिया भर में फैल गए और मदरसे की स्थापना की. आमिर खान मुत्तकी ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा- देवबंद इस्लामी दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र है. अफगानिस्तान से कई छात्र भारत में इंजीनियरिंग, साइंस की शिक्षा लेने आते हैं, उसी तरह इस्लामी शिक्षा भी लेने आते हैं.
अफगानिस्तान से कोई भी आतंकवादी भारत नहीं आएगा: अरशद मदनी
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी से मुलाकात के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा, “मैंने उनसे कहा कि आपके साथ हमारे संबंध सिर्फ अकादमिक नहीं हैं. आपने भारत की आजादी में योगदान दिया है. हमारे पूर्वजों ने भारत की आजादी के लिए अफगानिस्तान की धरती को चुना था. अपनी आजादी के लिए आपने अमेरिका और रूस जैसी ताकतों को हराया था. जब हमने ब्रिटेन को हराया था, तब आपने हमसे यह सीखा था कि यह कैसे किया जाता है. मैंने अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी से कहा कि यह मुलाकात दर्शाती है कि भारत के मुसलमानों और दारुल उलूम देवबंद के आपके साथ कितने गहरे रिश्ते हैं. दुनिया के सभी देशों के बीच, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो, सद्भाव होना चाहिए. हमारी कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई. दोनों देशों के बीच रिश्ते बेहतर होंगे. भारत को शिकायत रही है कि अफगानिस्तान भारत में आतंकवादी भेजता है. अब इस मुलाकात के बाद यह तय हो गया है कि अफगानिस्तान से कोई भी आतंकवादी भारत नहीं आएगा.”
भारत-अफगानिस्तान संबंध और मजबूत होंगे : आमिर खान मुत्तकी
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने दारुम उलूम उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भारत-अफगानिस्तान संबंध और मजबूत होंगे. मुत्तकी ने कहा, “मैं इस भव्य स्वागत और यहां के लोगों द्वारा दिखाए गए स्नेह के लिए आभारी हूं. मुझे उम्मीद है कि भारत-अफगानिस्तान संबंध और मजबूत होंगे. हम नए राजनयिक भेजेंगे और मुझे उम्मीद है कि आप लोग भी काबुल आयेंगे.” उन्होंने कहा, ”मुझे भविष्य में और मजबूत संबंधों की उम्मीद है- दिल्ली में जिस तरह से मेरा स्वागत हुआ, उससे निकट भविष्य में ये दौरे और भी ज्यादा हो सकते हैं.”
भारत ने अभी तक अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी
अफगानिस्तान में चार साल पहले तालिबान द्वारा सत्ता हथियाने के बाद वह भारत आने वाले तालिबान सरकार के पहले वरिष्ठ मंत्री हैं. भारत ने अभी तक अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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