विश्व बाल दिवस की पूर्व संध्या पर नीले रंग में सज गई पूरी दिल्ली, संसद भवन से कुतुब मीनार तक सब कुछ ब्लू

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विश्व बाल दिवस की पूर्व संध्या पर नीले रंग में सज गई पूरी दिल्ली, संसद भवन से कुतुब मीनार तक सब कुछ ब्लू

20 नवंबर को विश्व बाल दिवस है और इससे पहले भारत की राजधानी पूरी तरह से नीले रंग से नहा गई. संसद भवन से कुतुब मीनार तक सब कुछ गोब्लू हो गया है.

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20 नवंबर 2022 को विश्व बाल दिवस है और इसकी पूर्व संध्या पर करीब-करीब पूरी नीले रंग में सज गई या उससे नहा गई है. विश्व बाल दिवस पर यूनिसेफ (संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय बाल आपातकालीन फंड) की ओर से संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाना निर्धारित है. इसमें मूलत: बाल अधिकारों को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसका विषय ‘हर बच्चे के लिए समावेशन’ होगा.

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इससे पहले ही, भारत सरकार ने विश्व बाल दिवस की पूर्व संध्या पर संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) समेत पूरे देश में ऐतिहासिक स्मारक स्थलों को हर बच्चे के अधिकारों के समर्थन में नीले रंग की रोशनी से जगमगा दिया है.

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खासकर, भारत की राजधानी दिल्ली की बात करें, तो यहां पर राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, प्रधान मंत्री कार्यालय और एक ऐतिहासिक विरासत कुतुब मीनार को विश्व बाल दिवस के मौके पर बच्चों के अधिकार समर्थन में नीली रोशनी से जगमगाया गया है.

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आपको बता दें कि प्रत्येक साल 20 नवंबर को पूरी दुनिया में विश्व बाल दिवस मनाया जाता है. इस साल यूनिसेफ ने विश्व बाल दिवस के मौके पर बच्चों के अधिकारों के समावेशन को अपना विषय बनाया है.

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इससे पहले, यूनिसेफ ने 18 नवंबर को खेलों में बच्चों की जागरूकता बढ़ाने के लिए भी एक कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें क्रिकेट की दुनिया के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर समेत खेल की दुनिया के कई महान खिलाड़ियों को आमंत्रित किया गया था.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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