Weather Alert : भारत में 30 दिन लंबा होगा अब गर्मी का मौसम, इस दावे से बढ़ी टेंशन

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 16 Oct 2025 12:13 PM

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गर्मी के मौसम को लेकर किया गया बड़ा दावा (File Photo)

Weather Alert : एक स्टडी में दावा किया गया है कि दुनिया में हर साल 57 अत्यधिक गर्म दिन बढ़ेंगे. छोटे व गरीब देशों पर इसका ज्यादा असर देखने को मिलने वाला है. जानें इस स्टडी में और क्या जानकारी दी गई है.

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Weather Alert : एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि इस सदी के अंत तक दुनिया हर साल लगभग दो महीने तक ‘‘अत्यधिक गर्म’’ दिनों का सामना करेगी. इसका सबसे ज्यादा असर छोटे और गरीब देशों पर होगा, जबकि सबसे बड़े कार्बन उत्सर्जक देशों को कम असर पड़ेगा. हालांकि, 2015 के पेरिस जलवायु समझौते के बाद उत्सर्जन कम करने के प्रयासों ने इस गंभीर स्थिति को कुछ हद तक रोकने में मदद की है, लेकिन चुनौती अभी भी बनी हुई है.

स्टडी के अनुसार, अगर पेरिस जलवायु समझौता नहीं हुआ होता, तो पृथ्वी को हर साल 114 और घातक गर्म दिनों का सामना करना पड़ता. ‘वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन’ और अमेरिका स्थित ‘क्लाइमेट सेंट्रल’ के वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर मॉडल की मदद से वास्तविक समय से तुलना कर यह गणना की कि पेरिस समझौते से कितनी राहत मिली है.

दुनिया को अब की तुलना में 57 अतिरिक्त गर्म दिन झेलने होंगे

स्टडी के अनुसार, यदि सभी देश अपने वादों को पूरा करते हैं और वर्ष 2100 तक तापमान 2.6 डिग्री सेल्सियस बढ़ता है तो दुनिया को अब की तुलना में 57 अतिरिक्त गर्म दिन झेलने होंगे. लेकिन यदि तापमान चार डिग्री सेल्सियस बढ़ा तो यह संख्या दोगुनी हो जाएगी. ‘क्लाइमेट सेंट्रल’ की वैज्ञानिक क्रिस्टिना डाल ने कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन से दर्द और नुकसान तो होगा, लेकिन यह प्रगति भी दिखाती है कि पिछले 10 सालों में किए गए प्रयास असरदार रहे हैं.’’

औसतन बढ़ चुके हैं 11 अतिरिक्त ‘‘अत्यधिक गर्म’’ दिन

साल 2015 से अब तक दुनिया में औसतन 11 अतिरिक्त ‘‘अत्यधिक गर्म’’ दिन बढ़ चुके हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं. स्टडी में पाया गया कि छोटे द्वीपीय और समुद्र पर निर्भर देश जैसे सोलोमन द्वीप, समोआ, पनामा और इंडोनेशिया को सबसे अधिक नुकसान होगा. उदाहरण के लिए, पनामा को 149 अतिरिक्त गर्म दिनों का सामना करना पड़ेगा.

भारत में केवल 23-30 अतिरिक्त गर्म दिन बढ़ेंगे

इसके विपरीत अमेरिका, चीन और भारत जैसे प्रमुख उत्सर्जक देशों में केवल 23-30 अतिरिक्त गर्म दिन बढ़ेंगे. वे हवा में 42 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन उन्हें अतिरिक्त अत्यधिक गर्म दिनों का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा मिल रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह असमानता जलवायु न्याय की गहराई को दिखाती है कि जिन देशों ने कम प्रदूषण फैलाया है, वही सबसे ज्यादा जलवायु संकट झेलेंगे.

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लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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