Viral Video : लैंडस्लाइड के वक्त पत्थर बरस रहे थे, ब्लू टीशर्ट वाले ने किया कुछ ऐसा ; लोग कर रहे सैल्यूट

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 03 Sep 2025 12:48 PM

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उत्तराखंड में लैंडस्लाइड

Viral Video : मानसून की बारिश ने इस बार देश में जलप्रलय जैसी स्थिति बना दी है. भारी बारिश की वजह से जगह-जगह पर लैंडमाइंस की खबरें भी सामने आ रही हैं. सोशल मीडिया में उत्तराखंड के अल्मोड़ा का दृश्य वायरल है, जिसमें लैंडमाइंस की चपेट में एक व्यक्ति आ जाता है.

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Viral Video : इस बार मानसून की बारिश ने पूरे देश में तबाही मचा रखी है, पहाड़ों की स्थिति तो और भी खराब है. कहीं बादल फटने से लोगों की जान जा रही है, तो कहीं लैंडस्लाइड लोगों को लील रहा है. उत्तराखंड में लैंडस्लाइड का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लैंडस्लाइड का दृश्य लाइव है. इस वीडियो की खासियत यह है कि एक व्यक्ति लैंडस्लाइड की चपेट में आ जाता है और उसपर पत्थर बरसने लगते हैं. यह वीडियो

ब्लू टीशर्ट वाले सज्जन ने बचाई जान

वायरल वीडियो में यह स्पष्ट दिखता है कि जब लैंडस्लाइड होता है, तो एक व्यक्ति उसकी चपेट में आ जाता है और उसपर पत्थर गिरने लगते हैं. आसपास खड़े लोग जो लैंडस्लाइड से बचकर भाग रहे हैं, वो चिल्लाने लगते हैं कि अंकल को बचाओ-अंकल को बचाओ. वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक व्यक्ति पर चट्टान गिर रहे हैं और वह उनकी चपेट में है. उसी वक्त एक ब्लू टीशर्ट पहना हुआ व्यक्ति तेजी से सामने आता है, संभवत: वह वहां का लोकल आदमी है. वह चट्टानों की परवाह ना करते हुए दौड़कर उस व्यक्ति के पास पहुंचता है और किसी तरह उन्हें चट्टानों के बीच से सुरक्षित निकाल लाता है. उसके बाद उस व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पताल लेकर जाते हैं.

ब्लू टीशर्ट वाले की हो रही है तारीफ

वायरल वीडियो को काफी पसंद किया जा रहा है और देखने वाले इसपर खूबर कमेंट भी कर रहे हैं. एक व्यक्ति ने लिखा है कि ब्लू टीशर्ट वाले को पुरस्कार दिया जाना चाहिए. वहीं दूसरा व्यक्ति यह लिख रहा है कि कितना बहादुर आदमी है ये, जो अपनी जिंदगी की परवाह किए बिना दूसरे की जान बचा रहा है. इस व्यक्ति को सैल्यूट किया जाना चाहिए. किसी ने लिखा है कि ब्लू शर्ट में बहादुर आदमी. कई लोग यह भी लिख रहे हैं कि हमें ब्लू शर्ट वाले से प्रेरणा लेनी चाहिए. कुछ लोग कमेंट में यह लिख रहे हैं कि हिमालय पर्वत की ओर मानसून में जाने से बचना चाहिए, यह बिलकुल भी सुरक्षित नहीं है.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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