मीनाक्षी लेखी ने कहा-कृषि बिल के खिलाफ आंदोलन कर रहे लोग किसान नहीं मवाली, आपराधिक गतिविधि में थे शामिल

Updated at : 22 Jul 2021 5:30 PM (IST)
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मीनाक्षी लेखी ने कहा-कृषि बिल के खिलाफ आंदोलन कर रहे लोग किसान नहीं मवाली, आपराधिक गतिविधि में थे शामिल

मीनाक्षी लेखी ने कहा कि कृषि बिल के खिलाफ आंदोलन कर रहे लोग किसान नहीं बल्कि मवाली हैं. मीनाक्षी लेखी ने 26 जनवरी को लाल किले पर जो भी हुआ उसे आपराधिक गतिविधि करार दिया है.

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विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने आज मीडिया से बात करते हुए विपक्ष पर जमकर हमला बोला, उन्होंने कहा कि वे इतने गिर गये हैं कि राजनीतिक विरोध की वजह से देश की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं. मीडिया से बात करते हुए मीनाक्षी लेखी ने कहा कि कृषि बिल के खिलाफ आंदोलन कर रहे लोग किसान नहीं बल्कि मवाली हैं. मीनाक्षी लेखी ने 26 जनवरी को लाल किले पर जो भी उसे आपराधिक गतिविधि करार दिया है.

केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने टीएमसी और कांग्रेस के सदस्यों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि फोन टैपिंग का आरोप फेक न्यूज है. इस केस के जरिये भारत को बदनाम करने की साजिश की जा रही है और विपक्ष राजनीतिक विरोध की वजह से भारत को बदनाम करने में जुट गया है.

मीनाक्षी लेखी ने कहा कि एमनेस्टी ने फोन टैपिंग के लिस्ट से किनारा कर लिया है और कहा है कि ऐसी कोई लिस्ट नहीं है. वहीं पैगासस स्पाईवेयर के निर्माता कंपनी ने भी जासूसी की बात से इनकार कर दिया है.

गौरतलब है कि आज पेगासस जासूसी मुद्दे पर राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ. आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव जब इस मसले पर बयान दे रहे थे तो टीएमसी और कांग्रेस के सदस्यों ने खूब हंगामा किया और मंत्री से कागजात छीन कर फाड़ दिये.

विपक्ष का व्यवहार कुछ ऐसा है जिसे लोकतंत्र ने कभी नहीं देखा, जब पीएम नरेंद्र मोदी संसद में नये मंत्रियों का परिचय करा रहे थे, तो विपक्ष ने हंगाम किया.

मीनाक्षी लेखी ने जंतर -मंतर पर तीनों कृषि बिल के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को मवाली बताया है. मीनाक्षी लेखी ने कहा कि किसान आंदोलन के जरिये बिचौलिये की मदद की जा रही है. किसान बिल से किसानों को फायदा होगा, यही वजह है कि बिचौलिये इसका विरोध कर रहे हैं.

मीनाक्षी लेखी ने कहा कि किसान आंदोलन की आड़ में राजनीतिक लड़ाई लड़ी जा रही है और बिचौलियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है. गौरतलब है कि तीनों कृषि बिल के खिलाफ किसान नवंबर 2020 से आंदोलनरत हैं. सरकार और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत हुई है, लेकिन अबतक इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकला है.

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Posted By : Rajneesh Anand

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