Tribal: केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने दिल्ली स्थित नेशनल ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनटीआरआई) में ‘राष्ट्रीय वन अधिकार कानून(एफआरए) डिजिटल प्लेटफॉर्म’ के विकास पर नेशनल वर्कशॉप हैकाथॉन 2.0 का आयोजन किया. इस आयोजन का मकसद वन अधिकार कानून (एफआरए) 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के विकास के लिए इनोवेशन, व्यावहारिक समझ और शासन प्राथमिकताओं को एक साथ लाना है. सरकार की कोशिश वन अधिकार कानून को बेहतर बनाने की है ताकि आदिवासी समाज को इसका समग्र लाभ मिल सके.
इस वर्कशॉप में स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2025 की सभी 5 फाइनलिस्ट टीमों के साथ-साथ मंत्रालय के अधिकारी, आईआईटी दिल्ली और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र(एनआईसी) के तकनीकी विशेषज्ञों ने प्रस्तावित नेशनल एफआरए डिजिटल प्लेटफॉर्म के क्रियात्मक डिजाइन और सिस्टम आर्किटेक्चर को बेहतर बनाने, एकीकृत करने और अंतिम रूप देने के लिए आमंत्रित किया गया.
डिजिटल प्लेटफार्म बनाने के पीछे का मकसद समाधान के नये तरीकों के लिए एक एकल और समग्र रूप से केंद्रित डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में सामंजस्य बनाना है.
यह प्लेटफार्म एफआरए अभिलेखों के लिए एआई-संचालित डिजिटल अभिलेखागार बनाने का काम, वास्तविक समय की निगरानी के लिए एफआरए एटलस, सूचना तक पहुंच और शिकायत निवारण सहायता के लिए शिकायतकर्ता-केंद्रित चैटबॉट, साक्ष्य आधारित नीति निर्माण को सक्षम बनाने के लिए निर्णय समर्थन प्रणाली (डीएसएस) बनाना है.
एफआरए के कामकाज में आएगी पारदर्शिता
सरकार का मानना है कि एकीकृत एफआरए डिजिटल प्लेटफॉर्म से कानून के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही तय होगी और इससे कानून प्रभावी तरीके से लागू होगा. वर्कशॉप को संबोधित करते हुए जनजातीय मामलों के मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा ने कहा कि इस पहल का मकसद विकास को बढ़ावा देना है. इस तरह पहल की कामयाबी डिग्री या सर्टिफिकेट में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर असली समस्याओं को हल करने के लिए अपनायी गयी रचनात्मकता में निहित है. एफआरए के तहत भूमि का स्वामित्व न केवल कानूनी अधिकार देने का काम करता है बल्कि गरिमा, वैधता और आजीविका के मौके भी मुहैया कराता है. यह कानून पीढ़ीगत गरीबी को खत्म करने में अहम रोल अदा करता है.
एकीकृत मंच की आवश्यकता
मंत्रालय के संयुक्त सचिव अनंत प्रकाश पांडे ने नागरिक-केंद्रित डिजाइन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ऐसा एकीकृत मंच होना चाहिए जो शिकायतकर्ता की सभी शिकायतों का निवारण कर सके. शिक्षा मंत्रालय के इनोवेशन निदेशक योगेश ब्रह्मंकर ने कहा कि इस हैकाथान में 80 मंत्रालयों, विभागों, 8 राज्य सरकारों से 271 समस्या विवरणों पर आधारित 72165 विचार मिले और इन विचारों के आधार पर एकीकृत पोर्टल तैयार करने का काम मंत्रालय ने किया है.
इस पहल का मकसद सरकार, शिक्षाविदों और आदिवासी समुदायों के बीच सहयोग को मजबूत करते हुए डेटा-संचालित शासन, पारदर्शिता और वन अधिकारों के सहभागी क्रियान्वयन के लिए तकनीक का लाभ उठाना था. गौरतलब है कि एसआईएच पोर्टल पर प्रस्तुत 390 से अधिक अभिनव समाधानों में से पांच शीर्ष प्रदर्शन करने वाली टीमों को चुना गया. मंत्रालय ने एक एकीकृत, संपूर्ण राष्ट्रीय एफआरए डिजिटल प्लेटफॉर्म को सहयोगात्मक रूप से सह-विकसित करने के लिए केवल विजेता टीम को ही नहीं बल्कि सभी पांच चयनितों को शामिल करने का फैसला किया.

