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Transparent Taxation: टैक्सपेयर्स चार्टर के बारे में कितना जानते हैं आप, किन देशों में है लागू, कैसे होगा करदाताओं का फायदा?

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
पीएम मोदी
पीएम मोदी
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Transparent Taxation, Pm modi, waht is Taxpayers charter: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को ईमानदार करदाताओं के लिए नया प्लेटफॉर्म ‘पारदर्शी कराधान-ईमानदार का सम्मान’(ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन- ऑनरिंग द ऑनेस्ट) लॉन्च किया. इस मौके पर उन्होंने इस प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े कुछ मुख्य बिंदुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी.उन्होंने कहा कि 'ट्रांसपैरेंट टैक्सेशन-ऑनरिंग द ऑनेस्ट' के जरिए तीन बड़े कर सुधार होंगे. फेसलेस असेसमेंट, फेसलेस अपील और टैक्सपेयर्स चार्टर. फेसलेस असेसमेंट और टेक्सपैयर्स चार्टर गुरुवार को ही तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं. फेसलेस अपील 25 सितंबर यानी दीनदयाल उपाध्याय के जन्मदिवस से देशभर में लागू हो जाएगी.

क्या है टैक्सपेयर चार्टर

प्रधानमंत्री मोदी ने टैक्सपेयर्स चार्टर लागू करने का ऐलान किया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले बजट में टैक्सपेयर्स चार्टर लाने का ऐलान किया था. पिछले हफ्ते भी उन्होंने इस चार्टर को जल्द लागू करने के संकेत दिए थे. टैक्सपेयर्स चार्टर का मकसद करदाताओं और इनकम टैक्स विभाग के बीच विश्वास बढ़ाना, टैक्सपेयर्स की परेशानी कम करना और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना होता है.

जानकारी के मुताबिक, इस समय दुनिया के सिर्फ तीन देशों- अमेरिका, कनाडा और आस्ट्रेलिया में ही यह लागू है. इन देशों में लागू टैक्सपेयर्स चार्टर की कुछ बातें कॉमन हैं. उदाहरण के लिए जब तक यह साबित न हो जाए कि करदाता ने टैक्स चोरी या गड़बड़ी की है, तब तक उसे ईमानदार करदाता मानना होगा. इसका मतलब ये है कि बेवजह नोटिस भेजकर दबाव नहीं डाला जाएगा.

पीएम मोदी ने टैक्सपेयर चार्टर पर क्या कहा

पीएम मोदी ने टैक्सपेयर चार्टर को विकास की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है. उन्होंने कहा कि अब टैक्सपेयर को उचित, विनम्र और तर्कसंगत व्यवहार का भरोसा दिया गया है. यानि आयकर विभाग को अब टैक्सपेयर के स्वाभिमान का ​संवेदनशीलता के साथ ध्यान रखना होगा. इसके ज़रिए अब करदाता को उचित, विनम्र और तर्कसंगत व्यवहार का भरोसा दिया गया है.

अब आयकर विभाग को करदाता की गरिमा का संवेदनशीलता के साथ ध्यान रखना होगा. आयकर विभाग अब टैक्सपेयर को बिना किसी आधार के ही शक की नज़र से नहीं देख सकता. इसके अलावा करदाता के दायित्व भी होंगे. करदाता को कर इसलिए देना है क्योंकि उसी से सिस्टम चलता है. इससे देश अपना फर्ज निभा सकता है और उज्जवल भविष्य की ओर कदम भी रख सकता है. इसी तरह, कर संबंधी मामलों की अपील भी फेसलेस होगी.

Posted By: Utpal kant

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