ट्रांसजेंडर्स भी यौन हिंसा के खिलाफ लगा सकेंगे सुरक्षा की गुहार, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस
Author : Agency Published by : Prabhat Khabar Updated At : 12 Oct 2020 6:30 PM
सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) ने यौन हिंसा (Sexual Harassment) के अपराध के मामलों में ट्रांसजेंडर (Transgenders ) समुदाय को भी कानून का समान संरक्षण मुहैया कराने के लिए दायर जनहित याचिका पर सोमवार को केंद से जवाब मांगा.याचिका में दलील दी गयी है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों को यौन हिंसा के अपराधों से संरक्षण के लिए कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं है.
नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने यौन हिंसा के अपराध के मामलों में ट्रांसजेंडर समुदाय को भी कानून का समान संरक्षण मुहैया कराने के लिए दायर जनहित याचिका पर सोमवार को केंद से जवाब मांगा.याचिका में दलील दी गयी है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों को यौन हिंसा के अपराधों से संरक्षण के लिए कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं है.
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमणियन की पीठ ने कहा कि यह अच्छा विषय है जिस पर सुनवाई की आवश्यकता है. पीठ ने अधिवक्ता रीपक कंसल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह से कहा कि ऐसे मामलों का विवरण दिया जाये जिनमें न्यायालय ने कानून के अभाव में स्थिति से निबटने के लिये आदेश दिये थे.
वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान पीठ ने कार्य स्थल पर महिला के यौन उत्पीड़न की रोकथाम संबंधी विशाखा प्रकरण के दिशानिर्देशों और स्वेच्छा से दो वयस्कों के बीच समलैंगिक यौन संबंधों के मामले में शीर्ष अदालत के फैसले का जिक्र किया. सिंह ने कहा कि वह न्यायालय में इस तरह के मामलों का विवरण दाखिल करेंगे. इस याचिका में कानून मंत्रालय, सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण मंत्रालय को पक्षकार बनाया गया है.
इस याचिका में यौन अपराधों के संबंध में भारतीय दंड संहिता, 1860 के प्रावधानों के साथ ही इसमें और अन्य कानूनों में हाल ही में हुये संशोधनों का हवाला दिया गया है.साथ ही आरोप लगाया गया है कि इनमें से किसी भी कानून में ट्रांसजेन्डर, किन्नर और हिजड़ों के बारे में कोई जिक्र ही नहीं है.
Also Read: दशहरा- दीवाली और छठ से पहले सरकार दे रही फेस्टिवल एडवांस, जानिए किसको और कितना होगा फायदा
याचिका में तृतीय लैंगिक श्रेणी में आने वाले लोगों को कानून का समान संरक्षण प्रदान करने का अनुरोध किया गया है.इसमें कहा गया, ‘‘इस अदालत ने ट्रांसजेंडर लोगों को ‘लिंग की तृतीय श्रेणी’ के तहत रखने की घोषणा की है लेकिन उन्हें पुरुष, महिला या अन्य किसी ट्रांसजेंडर द्वारा यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करने के लिए भारतीय दंड संहिता में कोई प्रावधान या धारा नहीं है.”
याचिका में केंद्र सरकार को यौन अपराध से जुड़े आईपीसी के प्रावधानों/धाराओं में उचित बदलाव या व्याख्या करने और इसकी परिभाषाओं में ट्रांसजेंडर, ट्रांससेक्शुअल और किन्नरों को शामिल करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है.याचिका में भारतीय दंड संहिता की धारा 354ए (महिला का शीलभंग करना) के कतिपय उपबंधों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुये कहा गया है कि इसकी व्याख्या में यौन हिंसा के शिकार ट्रांसजेन्डर समुदाय के सदस्यों को बाहर रखा गया है जिससे संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन होता है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










