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बंगाल चुनाव से पहले किसानों को पीएम मोदी का गिफ्ट, 275 रुपए बढ़ा जूट का एमएसपी

Updated at : 24 Feb 2026 5:30 PM (IST)
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Jute MSP Hike bengal farmers West Bengal Elections 2026

जूट का एमएसपी बढ़ने से बंगाल के किसानों को होगा फायदा. फोटो : AI

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के जूट किसानों को विधानसभा चुनाव 2026 से पहले एक तोहफा दिया है. पीएम मोदी की अध्यक्षता में सेवा तीर्थ में हुई कैबिनेट बैठक में जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढ़ा दिया है. एमएसपी में कितनी वृद्धि की गयी है और अब कितना एमएसपी मिलेगा, सारी जानकारी आपको यहां मिलेगी.

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विधानसभा चुनाव 2026 से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के किसानों को एमएसपी की सौगात दी है. केंद्र सरकार ने जूट उत्पादक किसानों को राहत देते हुए 2026-27 के लिए कच्चे जूट का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 275 रुपए बढ़ाने का फैसला किया है. अब किसानों को कच्चे जूट पर 5,925 रुपए प्रति क्विंटल MSP मिलेगा.

सेवा तीर्थ में पीएम मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक

यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में लिया गया. खास बात यह रही कि बैठक प्रधानमंत्री के नये कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में हुई.

  • कैबिनेट के फैसले से बंगाल और असम के जूट उगाने वाले किसानों को होगा फायदा.
  • टीडी-3 ग्रेड के कच्चे जूट पर किसानों को उत्पादन पर 61.8 प्रतिशत का लाभ मिलेगा.
  • भारतीय जूट निगम (जेसीआई) केंद्र सरकार की नोडल एजेंसी बना रहेगा.
  • परिचालन में होने वाले किसी भी नुकसान की पूरी भरपाई केंद्र सरकार करेगी.

लागत से 1.5 गुणा एमएसपी देने की नीति पर सरकार कायम

बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार MSP को उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुणा रखने की नीति पर कायम है. उन्होंने कहा कि 2026-27 के लिए घोषित MSP देशभर की औसत उत्पादन लागत से 61.8 प्रतिशत अधिक लाभ सुनिश्चित करेगा.

जूट का एमएसपी 275 रुपए बढ़ा

पिछले मार्केटिंग सीजन 2025-26 में कच्चे जूट का एमएसपी 5,650 रुपए प्रति क्विंटल था. इसे अब बढ़ाकर 5,925 रुपए कर दिया गया है. सरकार का कहना है कि यह कदम जूट किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें बेहतर मूल्य दिलाने के लिए उठाया गया है.

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10 साल में 247 प्रतिशत बढ़ा एमएसपी

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2014-15 में कच्चे जूट का MSP 2,400 रुपए प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर 5,925 रुपए हो गया है. पिछले एक दशक में एमएसपी में करीब 247 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

2014-15 से 2025-26 तक 1342 करोड़ रुपए का भुगतान

वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच जूट किसानों को एमएसपी के रूप में 1,342 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया, जबकि वर्ष 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह राशि 441 करोड़ रुपए थी.

सरकार का दावा – किसानों की आर्थिक स्थिति होगी मजबूत

सरकार का दावा है कि एमएसपी में यह बढ़ोतरी जूट उत्पादक राज्यों, खासकर पूर्वी भारत के किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी. उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती देगी.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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