तीन स्टेज वाला रॉकेट, 350 किलो पेलोड कैपेसिटी : जानिए भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट की 5 खूबियां

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भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट 'विक्रम-1' (फोटो : ISRO)

भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट 'विक्रम-1' (फोटो : ISRO)

हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस ने भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 लॉन्च कर इतिहास रच दिया है. श्रीहरिकोटा से लॉन्च हुआ यह रॉकेट 350 किलोग्राम तक पेलोड लो-अर्थ ऑर्बिट में पहुंचाने में कैपेबल है. कार्बन फाइबर, 3D-प्रिंटेड इंजन और सैटेलाइट लॉन्च जैसी खूबियां इसे खास बनाती हैं.

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Vikram Rocket Launch : भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है. हैदराबाद स्थित निजी कंपनी ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ ने देश का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष सेंटर से लॉन्च किया. 'मिशन आगमन' के तहत हुए इस लॉन्च ने भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि हासिल की है. इस मिशन के साथ स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की पहली निजी कंपनी बन गई है, जिसने ऑर्बिटल क्लास रॉकेट लॉन्च किया.

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तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज और लिक्विड मॉड्यूल से लैस

विक्रम-1 को आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया गया है. इसमें तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज लगाए गए हैं, जो रॉकेट को शुरुआती उड़ान के दौरान आवश्यक ताकत देते हैं. इसके अलावा इसमें लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल भी लगाया गया है, जो अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद रॉकेट की दिशा और कक्षा को सटीक तरीके से नियंत्रित करता है. इसी तकनीक की मदद से यह अलग-अलग उपग्रहों को उनकी तय कक्षाओं में स्थापित कर सकता है.


विक्रम-1 रॉकेट
विक्रम-1 रॉकेट

350 किलो तक का पेलोड ले जाने में सक्षम

विक्रम-1 को छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों के लॉन्च को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. यह 450 किलोमीटर ऊंचाई वाली लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 350 किलोग्राम तक का पेलोड पहुंचाने की क्षमता रखता है. रॉकेट को 60 डिग्री इंक्लिनेशन वाली कक्षा के लिए तैयार किया गया है, जिससे पृथ्वी अवलोकन, संचार और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े कई मिशनों को लॉन्च किया जा सकता है.

कार्बन फाइबर और 3D-प्रिंटेड इंजन इसकी सबसे बड़ी ताकत

विक्रम-1 पूरी तरह कार्बन-कंपोजिट यानी कार्बन फाइबर से बना है. यह स्टील की तुलना में कई गुना हल्का होने के साथ काफी मजबूत भी होता है. कम वजन होने से रॉकेट ज्यादा पेलोड ले जा सकता है. इसके अलावा इसमें लगे कई इंजन और ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल 3D प्रिंटिंग तकनीक से तैयार किए गए हैं. इससे निर्माण लागत कम होती है और रॉकेट को तेजी से तैयार किया जा सकता है.

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डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया नाम

इस रॉकेट सीरीज का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है. स्काईरूट एयरोस्पेस का मानना है कि विक्रम-1 भविष्य में छोटे उपग्रहों के व्यावसायिक लॉन्च के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बन सकता है. इसके जरिए भारत वैश्विक स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ-साथ निजी स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी नई पहचान बना सकता है.


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आलोक पाठक

लेखक के बारे में

By आलोक पाठक

आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।

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