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एंटी टेररिज्म डे : एकता और मानवता से जीती जा सकती है आतंकवाद के खिलाफ जंग

By दिल्ली ब्यूरो
Updated Date
21 मई 1991 को तमिलनाडु के एक चुनावी सभा में एलटीटीई के फिदायीन हमले में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की हत्या कर दी गयी थी.
21 मई 1991 को तमिलनाडु के एक चुनावी सभा में एलटीटीई के फिदायीन हमले में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की हत्या कर दी गयी थी.
प्रतीकात्मक फाइल फोटो.

नयी दिल्ली : आज एंटी टेररिज्म डे है यानी आज 21 मई है और आज ही के दिन देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तमिलनाडु में एक चुनावी सभा में श्रीलंकाई आतंकवादी संगठन एलटीटीई के तथाकथित कुछ सदस्यों द्वारा फिदायीन हमला करके हत्या कर दी गयी थी. इस घटना को घटित हुए भले ही तीन दशक का समय बीतने वाला है, लेकिन आज भी देशवासियों की आंखों के सामने 1991 वाला वह मंजर कौंध जाता है. आज जब भारत समेत पूरा विश्व वैश्विक कोराना महामारी से जूझ रहा है, तो पाकिस्तान कश्मीरी राग अलापते हुए संघर्ष विराम का उल्लंघन कर भारत में घुसपैठ और गोलाबारी करने में जुटा है.

आज भले ही पाकिस्तान अपने नापाक इरादों से भारत पर गोलाबारी कर रहा है, लेकिन भारत में आतंकवाद नामक इस घातक समस्या की वजह से अब तक न जाने कितने लोगों ने अपनी जान गंवायी है और न जाने कितनों ने अपनों को खोया है. अगर जम इसकी गिनती करने बैठें, तो इसकी गिनती कर पाना काफी मुश्किल है. आतंकवाद के खिलाफ देशवासियों को प्रोत्साहित करने और लोगों में मानवता तथा एकता को बढ़ावा देने के लिए भारत में हर साल 21 मई को एंटी टेररिज्म डे मनाया जाता है. भारत में आतंकवाद के खिलाफ देश में एंटी टेररिज्म डे बीते 29 साल से मनाया जा रहा है.

जानें इस दिन से जुड़ा इतिहास : ऐक्चुअली, 1990 के दशक की शुरुआत के पहले ही साल यानी वर्ष 1991 में आज ही के दिन यानी 21 मई को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तमिलनाडु में एक रैली में फिदायीन बम हमले में हत्या कर दी गयी थी. हालांकि, बताया यह जाता है कि श्रीलंकाई आतंकवादी संगठन एलटीटीई द्वारा राजीव गांधी की हत्या के लिए किये गये फिदायीन बम धमाके में रैली में शामिल होने वाले 25 से अधिक अन्य लोगों की जानें भी गयी थीं. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की इस दुर्घटना में हत्या के बाद से ही उनकी पूण्यतिथि यानी 21 मई को हर साल एंटी टेररिज्म डे के रूप में मनाया जाता है. इस टी टेररिज्म डे के माध्यम से देश में आतंकवाद से होनेवाले खतरों और नुकसानों के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है.

बेहतर शिक्षा के साथ युवा कर सकते हैं आतंकवाद का सामना : इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य देशवासियों के बीच शांति और मानवता का संदेश फैलाना है. साथ ही देश के युवाओं को बेहतर शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना है, जिससे वे आतंकी गुटों में शामिल होने से बचें और देश को नुकसान पहुंचानेवाली इन घटनाओं को रोकने में अपनी भूमिका निभा सकें.

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