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ललित मोदी को फेमा मामले में पांच लोगों से जिरह की अनुमति देने के हाईकोर्ट के आदेश पर शीर्ष अदालत ने लगायी रोक

Updated at : 27 Oct 2020 9:35 PM (IST)
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ललित मोदी को फेमा मामले में पांच लोगों से जिरह की अनुमति देने के हाईकोर्ट के आदेश पर शीर्ष अदालत ने लगायी रोक

नयी दिल्ली : शीर्ष अदालत ने आईपीएल के पूर्व आयुक्त ललित मोदी को विदेशी मुद्रा विनियमन कानून के कथित उल्लंघन के मामले में पांच लोगों से जिरह करने की अनुमति देने के बंबई हाईकोर्ट के आदेश पर मंगलवार को रोक लगा दी.

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नयी दिल्ली : शीर्ष अदालत ने आईपीएल के पूर्व आयुक्त ललित मोदी को विदेशी मुद्रा विनियमन कानून के कथित उल्लंघन के मामले में पांच लोगों से जिरह करने की अनुमति देने के बंबई हाईकोर्ट के आदेश पर मंगलवार को रोक लगा दी. हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को निर्देश दिया था कि वह इन व्यक्तियों से जिरह करने की अनुमति ललित मोदी को दे. मालूम हो कि ललित मोदी और अन्य के खिलाफ फेमा कानून की धारा 42 के तहत कार्यवाही की जा रही है.

न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय की अपील पर ललित मोदी से जवाब मांगा और इसे इस मामले में पहले से ही लंबित अपीलों के साथ संलग्न कर दिया. पीठ ने इस मामले में ललित मोदी को नोटिस जारी करते हुए अपने आदेश में कहा, ”इस बीच, हाईकोर्ट के फैसले और आदेश पर रोक रहेगी.”

हाईकोर्ट ने 20 जून, 2019 को प्रवर्तन निदेशालय के आठ जुलाई, 2018 सहित तीन संदेशो को उस सीमा तक निरस्त कर दिया था, जिसमे उन तीन व्यक्तियों से जिरह करने की अनुमति देने से प्रवर्तन निदेशालय ने इनकार किया था, जिनके बयान को उसने अपना आधार बनाया है.

हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को निर्देश दिया था कि वह उन सभी व्यक्तियों से जिरह की अनुमति दे, जिनके बयानों को न्याय के लिए आधार बनाया गया है. मोदी ने बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन, पीटर ग्रिफिथ, एंन्ड्रू वाइल्डब्लड, ए के नजीर खान और डीके सिंह से जिरह की अनुमति मांगी थी.

मोदी ने उन सभी व्यक्तियों से संयुक्त रूप से सुनवाई करने का अनुरोध किया था, जिन्हें प्रवर्तन निदेशालय ने कारण बताओ नोटिस भेजे थे. एजेंसी ने इस अनुरोध को भी आठ जनवरी, 2018 को ठुकरा दिया था. हाईकोर्ट ने आठ जनवरी, 2018 का पत्र निरस्त करते हुए कहा था कि ईडी संयुक्त सुनवाई के अनुरोध पर विचार करके नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप उचित आदेश पारित करेगा.

इसी तरह, उसने निदेशालय का 21अगस्त, 2018 का संदेश भी उस सीमा तक निरस्त कर दिया था, जिसमे उसने बीसीसीआई को 20 जुलाई, 2011 को दिये गये कारण बताओ नोटिस की प्रति देने से इनकार कर दिया था. यह मामला प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी डीके सिंह की फेमा कानून के तहत 13 जुलाई, 2011 को दर्ज करायी गयी शिकायत का नतीजा है.

इसी शिकायत के आधार पर ईडी ने 20 जुलाई, 2011 को बीसीसीआई , एन श्रीनिवासन, एम पी पांडव और ललित मोदी को कारण बताओ नोटिस जारी किये थे. इन नोटिस का आधार बीसीसीआई द्वारा इंटरनेशल मैनेजमेंट ग्रुप, यूके लि की सेवाएं लेने और फेमा कानून का उल्लंघन करके उसे किये गये भुगतान थे.

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