Supreme Court में बड़ा बदलाव, गर्मी छुट्टी में भी लगेंगी अदालतें, ग्रीष्म अवकाश का नाम बदला

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 07 Nov 2024 8:31 PM

विज्ञापन

Supreme Court

Supreme Court ने अपने पारंपरिक ग्रीष्म अवकाश का नाम बदल कर आंशिक न्यायालय कार्य दिवस कर दिया है.

विज्ञापन

Supreme Court ने गर्मी छुट्टी का नाम बदलने का फैसला उस हालिया आलोचना के मद्देनजर मायने रखता है जिसमें कहा गया था कि शीर्ष अदालत में लंबा अवकाश रहता है. ये बदलाव सुप्रीम कोर्ट के नियम 2013 में एक संशोधन का हिस्सा है जो अब सुप्रीम कोर्ट (दूसरा संशोधन) नियमें, 2024 बन गया है और इसे पांच नवंबर को अधिसूचित किया गया.

क्या है सुप्रीम कोर्ट (दूसरा संशोधन) के नियम 2024 में

अधिसूचना में कहा गया है, आंशिक न्यायालय कार्य दिवस की अवधि और कोर्ट एवं इसके कार्यालयों के लिए अवकाश के दिनों की संख्या ऐसी होगी, जो चीफ जस्टिस द्वारा निर्धारित की जा सके और यह रविवार को छोड़कर 95 दिन से अधिक नहीं हो तथा इसे आधिकारिक गजट में प्रकाशित किया जाएगा. इसमें कहा गया है कि चीफ जस्टिस आंशिक कार्य दिवसों या छुट्टियों के दौरान, नोटिस के बाद सभी याचिकाओं, अत्यावश्यक प्रकृति के नियमित मामलों या ऐसे अन्य मामलों की सुनवाई के लिए एक या एक से अधिक न्यायाधीशों को नियुक्त कर सकते हैं, जैसा चीफ जस्टिस निर्देश दें.

सुप्रीम कोर्ट में हर साल गर्मी और शीतकालीन छुट्टी होती है

मौजूदा प्रणाली के तहत सुप्रीम कोर्ट में हर साल ग्रीष्म और शीतकालीन अवकाश होता है. हालांकि, शीर्ष अदालत इस अवधि के दौरान पूर्ण रूप से बंद नहीं होती. गर्मियों के दौरान, महत्वपूर्ण और तत्काल महत्व के विषयों की सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस द्वारा अवकाशकालीन पीठ गठित की जाती है. अवकाशकालीन न्यायाधीश शब्दावली की जगह नव-संशोधित नियमों में न्यायाधीश शब्द कर दिया गया है.

आंशिक न्यायालय कार्य दिवस 26 मई 2025 से शुरू होगा

2025 के सुप्रीम कोर्ट कैलेंडर के अनुसार, आंशिक न्यायालय कार्य दिवस 26 मई 2025 से शुरू होगा और 14 जुलाई 2025 को समाप्त होगा. चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा है कि जस्टिस इस अवकाश के दौरान भी अपना काम करेंगे. उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था, छुट्टियों के दौरान जस्टिस इधर-उधर नहीं घूमते या मौज-मस्ती नहीं करते. वे अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं, यहां तक कि सप्ताहांत में भी, अक्सर समारोहों में भाग लेते हैं, उच्च न्यायालयों का दौरा करते हैं, या कानूनी सहायता कार्य में लगे रहते हैं.

शनिवार और रविवार को हमारी छुट्टी नहीं रहती

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस न्यायमूर्ति बी आर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा था कि लोग लंबे अवकाश को लेकर शीर्ष अदालत की आलोचना करते हैं लेकिन वे नहीं समझते कि न्यायाधीशों की सप्ताहांत पर भी छुट्टी नहीं होती. उन्होंने कहा, वे सभी लोग जो कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में लंबा अवकाश होता है, नहीं जानते कि न्यायाधीश कैसे काम करते हैं. मेहता ने यह बात उस वक्त कही थी जब शीर्ष अदालत पश्चिम बंगाल सरकार की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार की मंजूरी लिए बगैर सीबीआई अपनी जांच में आगे बढ़ गई है.

नोट – भाषा इनपुट के साथ

विज्ञापन
ArbindKumar Mishra

लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola