Military Combat Parachute System : खतरनाक परिस्थितियों में भी सुरक्षित ऑपरेशन संभव, जान लें सैन्य लड़ाकू पैराशूट की खासियत

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 17 Oct 2025 9:50 AM

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सैन्य लड़ाकू पैराशूट सिस्टम (Photo: X)

Military Combat Parachute System : डीआरडीओ के पैराशूट सैन्य लड़ाकू पैराशूट सिस्टम का 32,000 फुट की ऊंचाई पर सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया. इसकी तस्वीर मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस ने जारी की है.

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Military Combat Parachute System : रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने स्वदेशी तरीके से बनाई गई सैन्य लड़ाकू पैराशूट प्रणाली का 32,000 फुट की ऊंचाई पर सफल परीक्षण किया. मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस ने इसकी तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की. इस सफलता के साथ अब भारतीय सेना में स्वदेशी पैराशूट प्रणालियों का इस्तेमाल करना आसान और संभव हो गया है.यह कदम देश की सुरक्षा और रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस ने एक्स पर लिखा–भारतीय वायु सेना के परीक्षण जम्परों ने 32,000 फीट की ऊंचाई से सैन्य लड़ाकू पैराशूट प्रणाली (MCPS) का सफल फ्रीफॉल जम्प किया. MCPS भारत की अकेली ऐसी प्रणाली है, जो 25,000 फीट से ऊपर काम करती है. इसमें धीरे उतरने, बेहतर कंट्रोल करने, सटीक नेविगेशन और NavIC सुविधा जैसी विशेषताएं हैं. इससे खतरनाक परिस्थितियों में भी सुरक्षित ऑपरेशन संभव है. इसे आगरा के ADRDE और बेंगलुरु के DBEML ने स्वदेशी रूप से बनाया है. यह आत्मनिर्भरता बढ़ाता है, साथ ही आयात पर निर्भरता कम करता है.

मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस ने कहा कि इस उपलब्धि से सैन्य लड़ाकू पैराशूट सिस्टम (एमसीपीएस) 25,000 फुट से अधिक ऊंचाई पर तैनाती में सक्षम हो गई है. यह भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा परिचालन में उपयोग में लाई जाने वाली एकमात्र पैराशूट सिस्टम है.

जान लें सैन्य लड़ाकू पैराशूट सिस्टम की खास बातें

1. 32,000 फुट की ऊंचाई से इसका परीक्षण सफल रहा.
2. स्वदेशी सिस्टम की दक्षता, विश्वसनीयता और उन्नत डिजाइन से तैयार किया गया है.
3. इसमें बेहतर कंट्रोल सिस्टम और बेहतर स्टीयरिंग क्षमता है, जो पैराट्रूपर्स को विमान से सुरक्षित रूप से बाहर निकलने में मदद करता है.
4. पूर्व निर्धारित ऊंचाई पर पैराशूट तैनात करने, सटीक रूप से दिशा तय करने और सही जगह में उतरने में सक्षम है.
5. यह सिस्टम नेविगेशन विद इंडियन कांस्टेलेशन के अनुरूप है.

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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